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Chamba News: मुसीबतें आईं, हौसला न डिगा पाईं, मंजिल पाई तो दूसरों को भी राह दिखाई
Sat, 07 Dec 2024 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 07 Dec 2024 11:00 PM IST
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चंबा। सलूणी क्षेत्र की इंदु ने कठिनाइयों का डटकर सामना करते हुए न केवल खुद को सशक्त किया, बल्कि दूसरों के लिए भी एक मिसाल कायम की है। शादी के कुछ साल बाद सड़क दुर्घटना में पति की मृत्यु के बाद इंदु के परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी बेटी के पालन-पोषण और पढ़ाई के लिए संघर्ष करते हुए, उन्होंने सिलाई और कढ़ाई के प्रशिक्षण को अपने जीवन का आधार बना लिया।
2011 में जब इंदु के पति का निधन हुआ तो उस वक्त उनकी बेटी केवल दो साल की थी और इस कठिन समय में इंदु ने अकेले ही घर-परिवार की जिम्मेदारी उठाई। बिना किसी बाहरी मदद के उन्होंने सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया और इस हुनर को दूसरों तक पहुंचाने का काम शुरू किया। इंदु ने अब तक लगभग 50 लड़कियों को सिलाई और कढ़ाई सिखाई, जिससे न केवल उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा की फीस भरी, बल्कि समाज में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए।
इंदु की यह कहानी समाज में उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और संघर्ष से आगे बढ़ने का हौसला रखती हैं। उनका संघर्ष यह दिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
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मैंने कभी हार नहीं मानी : इंदु
आज इंदु एक कपड़े की दुकान चला रही हैं और उनका कहना है कि मेरे पति के निधन के बाद मुझे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन, मैंने कभी हार नहीं मानी और काम शुरू किया। आज मैं खुश हूं कि मैं न केवल अपनी बेटी की देखभाल कर रही हूं, बल्कि दूसरों को भी सिलाई और कढ़ाई का हुनर सिखा रही हूं।
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2011 में जब इंदु के पति का निधन हुआ तो उस वक्त उनकी बेटी केवल दो साल की थी और इस कठिन समय में इंदु ने अकेले ही घर-परिवार की जिम्मेदारी उठाई। बिना किसी बाहरी मदद के उन्होंने सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया और इस हुनर को दूसरों तक पहुंचाने का काम शुरू किया। इंदु ने अब तक लगभग 50 लड़कियों को सिलाई और कढ़ाई सिखाई, जिससे न केवल उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा की फीस भरी, बल्कि समाज में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए।
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इंदु की यह कहानी समाज में उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और संघर्ष से आगे बढ़ने का हौसला रखती हैं। उनका संघर्ष यह दिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
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मैंने कभी हार नहीं मानी : इंदु
आज इंदु एक कपड़े की दुकान चला रही हैं और उनका कहना है कि मेरे पति के निधन के बाद मुझे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन, मैंने कभी हार नहीं मानी और काम शुरू किया। आज मैं खुश हूं कि मैं न केवल अपनी बेटी की देखभाल कर रही हूं, बल्कि दूसरों को भी सिलाई और कढ़ाई का हुनर सिखा रही हूं।