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अवैध सड़क निर्माण रोकने में डीएफओ, आरओ और बीओ का नहीं मिला साथ
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चंबा। हिमगिरि बीट में अवैध सड़क निर्माण को रोकने में अधिकारियों का साथ न मिलने की शिकायत वन रक्षक ने वन मुख्य अरण्यपाल से की है। इसमें वन रक्षक ने बताया कि जब उसने अवैध रूप से बनाई जा रही सड़क का निर्माण कार्य रुकवाया तो कार्रवाई के लिए बीओ, आरओ और डीएफओ को सूचित किया, लेकिन इन अधिकारियों ने उसका साथ देने से मना कर दिया। इसके चलते उसे ठेकेदार से जान से मारने की धमकी मिली। इस कारण उसे पुलिस में शिकायत देनी पड़ी।
हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने अभी तक इस दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं। वन रक्षक टेक चंद ने बताया कि उसकी बीट में बिना एफआरए मंजूरी से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी भनक लगते ही उन्होंने मौके पर जाकर सड़क का कार्य रुकवा दिया। इस दौरान ठेकेदार और उनके बीच काफी कहासुनी भी हुई। उन्हें ठेकेदार की ओर से जान से मारने की धमकी तक मिली। इसकी परवाह न करते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन किया। साथ ही वन विभाग की भूमि और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई। लेकिन, इस कार्रवाई में उन्हें अपने अधिकारियों का समर्थन नहीं मिला, बल्कि अधिकारियों ने इस कार्रवाई के लिए उनका तबादला दूसरी बीट में कर दिया। इस आदेशों के खिलाफ जाकर उन्हें कोर्ट से स्टे लेना पड़ा। कहा कि जब तक अवैध सड़क निर्माण करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हो जाती। वे अपना तबादला दूसरी बीट में नहीं होने देंगे। इसके लिए उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया है।
इस मामले को लेकर वन रक्षक ने उन्हें पत्र भेजा है। इस मामले की गहनता से जांच करने के लिए संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।
-उपासना पटियाल, मुख्य वन अरण्यपाल चंबा
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हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने अभी तक इस दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठाए हैं। वन रक्षक टेक चंद ने बताया कि उसकी बीट में बिना एफआरए मंजूरी से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी भनक लगते ही उन्होंने मौके पर जाकर सड़क का कार्य रुकवा दिया। इस दौरान ठेकेदार और उनके बीच काफी कहासुनी भी हुई। उन्हें ठेकेदार की ओर से जान से मारने की धमकी तक मिली। इसकी परवाह न करते हुए उन्होंने अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन किया। साथ ही वन विभाग की भूमि और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई। लेकिन, इस कार्रवाई में उन्हें अपने अधिकारियों का समर्थन नहीं मिला, बल्कि अधिकारियों ने इस कार्रवाई के लिए उनका तबादला दूसरी बीट में कर दिया। इस आदेशों के खिलाफ जाकर उन्हें कोर्ट से स्टे लेना पड़ा। कहा कि जब तक अवैध सड़क निर्माण करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हो जाती। वे अपना तबादला दूसरी बीट में नहीं होने देंगे। इसके लिए उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया है।
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इस मामले को लेकर वन रक्षक ने उन्हें पत्र भेजा है। इस मामले की गहनता से जांच करने के लिए संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।
-उपासना पटियाल, मुख्य वन अरण्यपाल चंबा