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भक्ति का अर्थ है भगवान को याद करना : सुरेंद्र
Sun, 20 Oct 2024 10:05 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 20 Oct 2024 10:05 PM IST
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चंबा के निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में सत्संग सुनते श्रधालू।स्त्रोत जागरूक पाठक
बनीखेत (चंबा)। निरंकारी शाखा सुरंगाणी ने बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग करवाया। इसमें महात्मा सुरेंद्र शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पहले ईश्वर की पहचान जरूरी है।
ईश्वर को साकार रूप में देखने के लिए एक अलौकिक उस दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है, जो केवल सतगुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ है भगवान को याद करना, अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को करते समय हर पल उनकी उपस्थिति को महसूस करना और इस प्रकार इसे अपना स्वभाव बनाना। भक्ति अपने स्वार्थ या किसी सांसारिक इच्छा की प्राप्ति के लिए प्रेरित नहीं होनी चाहिए। कहा कि मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है। इसका परम उद्देश्य वक्त के सतगुरु से निराकार प्रभु परमात्मा का ज्ञान प्राप्त कर यशोगान व भक्ति करना और जन्म मरण के बंधनों से छुटकारा पाकर मोक्ष प्राप्त करना है। इस मौके पर डलहौजी, टप्पर, बनीखेत, बगढार, बाथरी, गोली, देवीदेहरा और परिहार से निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। संवाद
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ईश्वर को साकार रूप में देखने के लिए एक अलौकिक उस दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है, जो केवल सतगुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति का अर्थ है भगवान को याद करना, अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को करते समय हर पल उनकी उपस्थिति को महसूस करना और इस प्रकार इसे अपना स्वभाव बनाना। भक्ति अपने स्वार्थ या किसी सांसारिक इच्छा की प्राप्ति के लिए प्रेरित नहीं होनी चाहिए। कहा कि मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है। इसका परम उद्देश्य वक्त के सतगुरु से निराकार प्रभु परमात्मा का ज्ञान प्राप्त कर यशोगान व भक्ति करना और जन्म मरण के बंधनों से छुटकारा पाकर मोक्ष प्राप्त करना है। इस मौके पर डलहौजी, टप्पर, बनीखेत, बगढार, बाथरी, गोली, देवीदेहरा और परिहार से निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। संवाद
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