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महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में गरजी माकपा
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चंब में उपायुक्त कार्यालय बाहर परिसर में प्रदर्शन करते मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्य?
- फोटो : Chamba
चंबा। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सरकारी उपक्रमों का निजीकरण, किसानों और मजदूरों के खिलाफ मोदी सरकार की नीतियों को लेकर माकपा जिला कमेटी ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। माकपा के जिला सचिव नरेंद्र कुमार ने बताया कि पार्टी की केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर 14 से 24 सितंबर तक पूरे देश में मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अभियान चलाया गया है।
कहा कि मोदी सरकार ने देश को पीछे की ओर धकेला है। देश में पहली बार खाने की वस्तुओं पर जीएसटी लगाया गया है। महंगाई अपने चरम पर है। रसोई गैस सिलिंडर 1,100 रुपये से ऊपर चला गया है। सरकार सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में बेच रही है। कहा कि मोदी सरकार की नाकामयाबी यह रही है की पिछले आठ सालों में रोजगार पैदा नहीं कर पाए। दो करोड़ की नौकरियां देने की बात करने वाली भाजपा ने सबसे अधिक बेरोजगारी पैदा कर दी।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार तो 20 से 24 साल के बेरोजगार युवाओं की दर 42 प्रतिशत के भयावह स्तर पर है। केंद्र सरकार के अपने 10 लाख पद खाली हैं। उन्हें भरा नहीं जा रहा है। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने 3.63 लाख करोड़ की संपत्तियां बेची हैं।
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मजदूरों के खिलाफ लाई गई श्रम संहिताओं को लाकर मोदी सरकार ने अपनी नियत साफ कर दी है की वह घोर मजदूर विरोधी हैं। कहा कि 42 श्रम कानूनों को खत्म करके उन्हें चार संहिताओं में बदल कर मोदी सरकार ने मजदूर को लूट के लिए कंपनी के मालिकों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। इस अवसर पर विपन शर्मा, सुदेश ठाकुर, प्रेम कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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कहा कि मोदी सरकार ने देश को पीछे की ओर धकेला है। देश में पहली बार खाने की वस्तुओं पर जीएसटी लगाया गया है। महंगाई अपने चरम पर है। रसोई गैस सिलिंडर 1,100 रुपये से ऊपर चला गया है। सरकार सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में बेच रही है। कहा कि मोदी सरकार की नाकामयाबी यह रही है की पिछले आठ सालों में रोजगार पैदा नहीं कर पाए। दो करोड़ की नौकरियां देने की बात करने वाली भाजपा ने सबसे अधिक बेरोजगारी पैदा कर दी।
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सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार तो 20 से 24 साल के बेरोजगार युवाओं की दर 42 प्रतिशत के भयावह स्तर पर है। केंद्र सरकार के अपने 10 लाख पद खाली हैं। उन्हें भरा नहीं जा रहा है। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने 3.63 लाख करोड़ की संपत्तियां बेची हैं।
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मजदूरों के खिलाफ लाई गई श्रम संहिताओं को लाकर मोदी सरकार ने अपनी नियत साफ कर दी है की वह घोर मजदूर विरोधी हैं। कहा कि 42 श्रम कानूनों को खत्म करके उन्हें चार संहिताओं में बदल कर मोदी सरकार ने मजदूर को लूट के लिए कंपनी के मालिकों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। इस अवसर पर विपन शर्मा, सुदेश ठाकुर, प्रेम कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।