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परमात्मा से जुड़ाव और निस्वार्थ ही सच्ची भक्ति का अर्थ : महात्मा
Sun, 19 Jan 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 19 Jan 2025 11:09 PM IST
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संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में हुआ साप्ताहिक सत्संग का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग की अध्यक्षता महात्मा डॉ. राजेंद्र ने की। सत्संग में साहो, जडेरा, राख, जांगी, मैहला, मंगला, आदर्शनगर, आदि क्षेत्रों से आए निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। मंच पर विराजमान महात्मा डॉ. राजेंद्र ने अपने प्रवचनों से साध संगत को भाव विभोर किया। कहा कि भक्ति वह अवस्था है, जो जीवन को दिव्यता और आनंद से भर देती है। यह न इच्छाओं का सौदा है, न स्वार्थ का माध्यम। सच्ची भक्ति का अर्थ है कि परमात्मा से गहरा जुड़ाव और परमात्मा से निस्वार्थ प्रेम हहै। कहा कि ब्रह्मज्ञान भक्ति का आधार है। यह जीवन को उत्सव बना देता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखावे से परे और स्वार्थ व लालच से मुक्त होना चाहिए। कहा कि दूध में नींबू डालने से वह फट जाता है, वैसे ही भक्ति में लालच और स्वार्थ हो तो वह अपनी पवित्रता खो देती है। सत्संग के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सभी निरंकारी अनुयायियों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने की।
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चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग की अध्यक्षता महात्मा डॉ. राजेंद्र ने की। सत्संग में साहो, जडेरा, राख, जांगी, मैहला, मंगला, आदर्शनगर, आदि क्षेत्रों से आए निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। मंच पर विराजमान महात्मा डॉ. राजेंद्र ने अपने प्रवचनों से साध संगत को भाव विभोर किया। कहा कि भक्ति वह अवस्था है, जो जीवन को दिव्यता और आनंद से भर देती है। यह न इच्छाओं का सौदा है, न स्वार्थ का माध्यम। सच्ची भक्ति का अर्थ है कि परमात्मा से गहरा जुड़ाव और परमात्मा से निस्वार्थ प्रेम हहै। कहा कि ब्रह्मज्ञान भक्ति का आधार है। यह जीवन को उत्सव बना देता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप दिखावे से परे और स्वार्थ व लालच से मुक्त होना चाहिए। कहा कि दूध में नींबू डालने से वह फट जाता है, वैसे ही भक्ति में लालच और स्वार्थ हो तो वह अपनी पवित्रता खो देती है। सत्संग के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सभी निरंकारी अनुयायियों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने की।