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हर गांव में केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेगी कांग्रेस : भरमौरी
Fri, 16 Jan 2026 11:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:08 PM IST
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चंबा के चुराह में मनरेगा को लेकर प्रदर्शन करते कांग्रेस के पदाधिकारी और अन्य।संवाद
चुराह (चंबा)। पहली बार चुराह पहुंचे कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी ने मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनविरोधी नीतियां अपना रही है। इन विरोधी नीतियों से कांग्रेस हर गांव और हर जोन के लोगों को अवगत करवाएगी।
उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत विकास कार्यों का चयन ग्रामसभा और पंचायत स्तर पर होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा कार्य तय किए जा रहे हैं, जो पंचायती राज व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानून लागू किए थे, जिन्हें जनआंदोलन के दबाव में वापस लेना पड़ा। अब मनरेगा का नाम और स्वरूप बदलकर नया कानून लाया गया है, जो ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है। अकेले चुराह विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 हजार मनरेगा मजदूर जुड़े हुए हैं और कांग्रेस किसी भी सूरत में उनके अधिकारों से समझौता नहीं होने देगी।
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जिला अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा के बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और काम के दिनों में कमी कर केंद्र सरकार इस कानून को धीरे-धीरे खत्म करने पर आमादा है, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी सफल नहीं होने देगी।
इससे पूर्व चुराह पहुंचने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरजीत भरमौर का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। मंच से वक्ताओं ने मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों को ग्रामीण भारत के खिलाफ बताया। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष की अगुवाई में कांग्रेसियों ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (2005) को समाप्त कर नए कानून को लागू किए जाने का कड़ा विरोध दर्ज किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि मनरेगा 2005 को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, मजदूरी बढ़ाकर उसे महंगाई सूचकांक से जोड़ा जाए और पंचायतों को विकास कार्य तय करने की पूर्ण स्वायत्तता दी जाए।
इस दौरान कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना ने कहा कि संगठन-सृजन कार्यक्रम लगभग पूरा हो चुका है और शीघ्र ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी का गठन कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। वहीं, परवेज अली बट्ट ने कहा कि चुराह जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में मनरेगा पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे बड़ा आधार है।
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उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत विकास कार्यों का चयन ग्रामसभा और पंचायत स्तर पर होता था, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा कार्य तय किए जा रहे हैं, जो पंचायती राज व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की भावना के खिलाफ है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानून लागू किए थे, जिन्हें जनआंदोलन के दबाव में वापस लेना पड़ा। अब मनरेगा का नाम और स्वरूप बदलकर नया कानून लाया गया है, जो ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है। अकेले चुराह विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 हजार मनरेगा मजदूर जुड़े हुए हैं और कांग्रेस किसी भी सूरत में उनके अधिकारों से समझौता नहीं होने देगी।
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जिला अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा के बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और काम के दिनों में कमी कर केंद्र सरकार इस कानून को धीरे-धीरे खत्म करने पर आमादा है, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी सफल नहीं होने देगी।
इससे पूर्व चुराह पहुंचने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरजीत भरमौर का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। मंच से वक्ताओं ने मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों को ग्रामीण भारत के खिलाफ बताया। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष की अगुवाई में कांग्रेसियों ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (2005) को समाप्त कर नए कानून को लागू किए जाने का कड़ा विरोध दर्ज किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि मनरेगा 2005 को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, मजदूरी बढ़ाकर उसे महंगाई सूचकांक से जोड़ा जाए और पंचायतों को विकास कार्य तय करने की पूर्ण स्वायत्तता दी जाए।
इस दौरान कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना ने कहा कि संगठन-सृजन कार्यक्रम लगभग पूरा हो चुका है और शीघ्र ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी का गठन कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। वहीं, परवेज अली बट्ट ने कहा कि चुराह जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में मनरेगा पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे बड़ा आधार है।