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ढ़ाई साल बाद भी चंबा मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ी की जांच अधूरी
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में हुई करोड़ों की गड़बड़ी को लेकर प्रदेश सरकार ढाई साल में जांच पूरी नहीं कर पाई है। अभी भी करोड़ों की गड़बड़ी की जांच अधूूरी है। इस गड़बड़ी में कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, वे बेनकाब नहीं हो पाए हैं।
चंबा मेडिकल कॉलेज में मशीनरी की खरीद को लेकर यह गड़बड़ी की गई है, लेकिन हैरानी इस बात की है कि भाजपा सरकार गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी जांच को पूरा नहीं कर पा रही है। मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ने मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ियों को लेकर सरकार और उच्चाधिकारी को पूरी जानकारी दे दी है। बावजूद इसके सरकार इस मामले में विजिलेंस जांच नहीं करवा रही है। अगर सरकार इस मामले में विजिलेंस जांच करवाती है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों सहित, प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता नप सकते हैं। क्योंकि चंबा मेडिकल कॉलेज में हुई करोड़ों रुपये की गड़बड़ी को लेकर सबकी मिलीभगत हो सकती है।
चंबा मेडिकल कॉलेज में जो भी मशीनरी खरीदी गई है, उसे मशीन के चार गुणा अधिक दामों पर खरीदा गया है। इतना ही नहीं इन मशीनों की खरीद और पेमेंट को लेकर कमेटियां गठित थी। कमेटी में शामिल अधिकारियों के हस्ताक्षरों के बाद ही मशीनरी का भुगतान हुआ। ऐसे में अगर मामले की पूरी जांच होती है तो कई अधिकारी और अफसर बेनकाब होंगे। मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ी को लेकर ढाई वर्ष पहले जांच शुरू हुई थी, लेकिन अभी तक सरकार इस जांच को पूरा नहीं कर पाई है।
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चंबा मेडिकल कॉलेज में मशीनरी की खरीद को लेकर यह गड़बड़ी की गई है, लेकिन हैरानी इस बात की है कि भाजपा सरकार गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी जांच को पूरा नहीं कर पा रही है। मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ने मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ियों को लेकर सरकार और उच्चाधिकारी को पूरी जानकारी दे दी है। बावजूद इसके सरकार इस मामले में विजिलेंस जांच नहीं करवा रही है। अगर सरकार इस मामले में विजिलेंस जांच करवाती है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों सहित, प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता नप सकते हैं। क्योंकि चंबा मेडिकल कॉलेज में हुई करोड़ों रुपये की गड़बड़ी को लेकर सबकी मिलीभगत हो सकती है।
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चंबा मेडिकल कॉलेज में जो भी मशीनरी खरीदी गई है, उसे मशीन के चार गुणा अधिक दामों पर खरीदा गया है। इतना ही नहीं इन मशीनों की खरीद और पेमेंट को लेकर कमेटियां गठित थी। कमेटी में शामिल अधिकारियों के हस्ताक्षरों के बाद ही मशीनरी का भुगतान हुआ। ऐसे में अगर मामले की पूरी जांच होती है तो कई अधिकारी और अफसर बेनकाब होंगे। मेडिकल कॉलेज में हुई गड़बड़ी को लेकर ढाई वर्ष पहले जांच शुरू हुई थी, लेकिन अभी तक सरकार इस जांच को पूरा नहीं कर पाई है।
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