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Chamba News: प्रधान की रिपोर्ट के आधार पर मिले प्रमाण पत्र
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हाली जाति के लोगों ने उठाई मांग
डीसी के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हाली जाति के लोगों को भी अन्य उपजातियों की तर्ज पर पंचायत प्रधान की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग उठने लगी है। मंगलवार को विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने उपायुक्त डीसी राणा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांग की।
आंबेडकर मिशन सोसाइटी चंबा के अध्यक्ष शिवकरण चंद्रा, महासचिव योगेश्वर कुमार और अन्य संस्थाओं से दीप राज, कमल, नरेंद्र, धर्म सिंह आदि ने बताया कि 1952 में बंदोबस्त के समय में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाली जाति हाली को बेहद जटिल प्रक्रिया में उलझा दिया गया है। इसके तहत एक समुदाय विशेष को अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पूरे राजस्व के रिकार्ड को प्रमाणित करवाना पड़ता है। जो पुरातन भाषा टांकरी में है जबकि जाति प्रमाण पत्र के लिए अनुसूचित जाति वर्ग की अन्य उपजातियों को ग्राम पंचायत की ओर से दी गई प्रवर नकल को आधार मान कर तहसीलदार उसे प्रमाण पत्र जारी करता है। इसके अलावा हाली जाति के लोगों को अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया में से गुजरना पड़ता है। यह हाली जाति समुदाय के लोगों के साथ अन्याय है। बंदोबस्त के समय से ही हाली जाति के राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है। कहा कि जिस प्रकार अन्य उपजातियों को ग्राम पंचायत प्रधान की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं उसी तर्ज पर हाली जाति के प्रमाणपत्र को भी ग्राम पंचायत प्रधान की रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण के आधार पर प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाए।
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डीसी के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हाली जाति के लोगों को भी अन्य उपजातियों की तर्ज पर पंचायत प्रधान की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग उठने लगी है। मंगलवार को विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने उपायुक्त डीसी राणा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मांग की।
आंबेडकर मिशन सोसाइटी चंबा के अध्यक्ष शिवकरण चंद्रा, महासचिव योगेश्वर कुमार और अन्य संस्थाओं से दीप राज, कमल, नरेंद्र, धर्म सिंह आदि ने बताया कि 1952 में बंदोबस्त के समय में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आने वाली जाति हाली को बेहद जटिल प्रक्रिया में उलझा दिया गया है। इसके तहत एक समुदाय विशेष को अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पूरे राजस्व के रिकार्ड को प्रमाणित करवाना पड़ता है। जो पुरातन भाषा टांकरी में है जबकि जाति प्रमाण पत्र के लिए अनुसूचित जाति वर्ग की अन्य उपजातियों को ग्राम पंचायत की ओर से दी गई प्रवर नकल को आधार मान कर तहसीलदार उसे प्रमाण पत्र जारी करता है। इसके अलावा हाली जाति के लोगों को अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया में से गुजरना पड़ता है। यह हाली जाति समुदाय के लोगों के साथ अन्याय है। बंदोबस्त के समय से ही हाली जाति के राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है। कहा कि जिस प्रकार अन्य उपजातियों को ग्राम पंचायत प्रधान की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं उसी तर्ज पर हाली जाति के प्रमाणपत्र को भी ग्राम पंचायत प्रधान की रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण के आधार पर प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाए।
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