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Chamba News: सीबीएसई का बोर्ड तो लगा लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी नदारद
Sun, 14 Jun 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 14 Jun 2026 10:57 PM IST
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किहार स्कूल में शिक्षकों की कमी पर अब जवाब देने लगा एसएमसी का धैर्य
चेताया, समस्याएं का का समाधान नहीं किया तो शुरू होगा बड़ा जनआंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। राजकीय माध्यमिक पाठशाला किहार को सीबीएसई बोर्ड से जोड़कर सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का सपना दिखाया लेकिन जमीनी हकीकत उस सपने से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
छात्रों की संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है मगर स्कूल आज भी शिक्षकों की कमी, कक्षाओं के अभाव और स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
एसएमसी अध्यक्ष हारून बट ने कहा कि सीबीएसई में विलय के बाद स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। लोगों ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम मानते हुए अपने बच्चों का दाखिला करवाया लेकिन बढ़ी हुई संख्या के अनुरूप न तो अतिरिक्त स्टाफ दिया गया और न ही स्कूल के ढांचे का विस्तार किया गया। एक हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल में आज भी पूरा स्टाफ नहीं है। विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त कमरे भी उपलब्ध नहीं हैं। जब स्कूल को सीबीएसई बोर्ड के तहत लाया गया तो क्या विभाग ने भविष्य की जरूरतों का आकलन नहीं किया था। यदि छात्र संख्या बढ़नी थी तो पहले से ही अतिरिक्त शिक्षकों, कक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की योजना बनाई जानी चाहिए थी। स्कूल में स्थायी प्रधानाचार्य तक की नियुक्ति नहीं है।
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एसएमसी सदस्यों में देस राज, जोगिंदर सिंह, मधुबाला, महिंदर मिश्रा और मुमताज ने कहा कि यदि जल्द ही स्कूल की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो अभिभावकों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य का है। किहार के बच्चों को सिर्फ सीबीएसई का साइनबोर्ड नहीं, बल्कि सीबीएसई स्तर की शिक्षा और सुविधाएं चाहिए।
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चेताया, समस्याएं का का समाधान नहीं किया तो शुरू होगा बड़ा जनआंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। राजकीय माध्यमिक पाठशाला किहार को सीबीएसई बोर्ड से जोड़कर सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का सपना दिखाया लेकिन जमीनी हकीकत उस सपने से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।
छात्रों की संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है मगर स्कूल आज भी शिक्षकों की कमी, कक्षाओं के अभाव और स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
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एसएमसी अध्यक्ष हारून बट ने कहा कि सीबीएसई में विलय के बाद स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। लोगों ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम मानते हुए अपने बच्चों का दाखिला करवाया लेकिन बढ़ी हुई संख्या के अनुरूप न तो अतिरिक्त स्टाफ दिया गया और न ही स्कूल के ढांचे का विस्तार किया गया। एक हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल में आज भी पूरा स्टाफ नहीं है। विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त कमरे भी उपलब्ध नहीं हैं। जब स्कूल को सीबीएसई बोर्ड के तहत लाया गया तो क्या विभाग ने भविष्य की जरूरतों का आकलन नहीं किया था। यदि छात्र संख्या बढ़नी थी तो पहले से ही अतिरिक्त शिक्षकों, कक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की योजना बनाई जानी चाहिए थी। स्कूल में स्थायी प्रधानाचार्य तक की नियुक्ति नहीं है।
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एसएमसी सदस्यों में देस राज, जोगिंदर सिंह, मधुबाला, महिंदर मिश्रा और मुमताज ने कहा कि यदि जल्द ही स्कूल की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो अभिभावकों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य का है। किहार के बच्चों को सिर्फ सीबीएसई का साइनबोर्ड नहीं, बल्कि सीबीएसई स्तर की शिक्षा और सुविधाएं चाहिए।