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साहो जातर मेले में भस्मासुर नृत्य की धूम
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चंद्रशेखर मंदिर परिसर में आयोजित साहो जातर मेले के दौरान सुहाली नृत्य करते पुरुष।
- फोटो : Chamba
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साहो (चंबा)। कोरोना काल के दो वर्ष बाद आयोजित साहो जातर मेले में भस्मासुर नृत्य की खूब धूम रही। मेले में ऐतिहासिक चंद्रशेखर मंदिर परिसर में पारंपरिक वेशभूषा चोला-डोरा पहन कर पुरुषों ने सुहाली नृत्य किया।
इस दौरान परौथा से आने वाली जातर भी इसमें शामिल हुई। पंचायत प्रतिनिधियों और चंद्रशेखर विकास कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जातर मेले में साहो पंचायत सहित दूरदराज क्षेत्रों की पंचायतों के लोग भी पहुंचे। साहो पंचायत प्रधान पूूजा शर्मा ने बताया कि साहो जातर मेले को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्सुकता रहती है। जातर मेला आरंभ होने से पहले रात को जागरण का आयोजन किया जाता है।
मेले की सुबह चार बजे चंद्रशेखर मंदिर परिसर में स्थित मेखली (पत्थर के रूप में विराजमान शिला) के बीच से बच्चे, महिलाएं और पुरुष आरपार होते हैं। लोगों में मान्यता है कि ऐसा करने से जादू-टोने का असर खत्म हो जाता है। बताया कि शुक्रवार को कोढ़ी पंचायत घर के पास स्थित काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अतिथियों को पगड़ी पहनाई गई। साथ ही राजवंश के समय से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए पौराणिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जातर ऐतिहासिक चंद्रशेखर मंदिर पहुंची। यहां पर भी पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद सुहाली नृत्य प्रस्तुत किया गया। सायं चार बजे शिव गूर नाचता है और विभिन्न मनोकामनाएं लेकर आने वाले लोगों को आशीर्वाद आशीर्वाद देता है।
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इस दौरान परौथा से आने वाली जातर भी इसमें शामिल हुई। पंचायत प्रतिनिधियों और चंद्रशेखर विकास कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जातर मेले में साहो पंचायत सहित दूरदराज क्षेत्रों की पंचायतों के लोग भी पहुंचे। साहो पंचायत प्रधान पूूजा शर्मा ने बताया कि साहो जातर मेले को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्सुकता रहती है। जातर मेला आरंभ होने से पहले रात को जागरण का आयोजन किया जाता है।
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मेले की सुबह चार बजे चंद्रशेखर मंदिर परिसर में स्थित मेखली (पत्थर के रूप में विराजमान शिला) के बीच से बच्चे, महिलाएं और पुरुष आरपार होते हैं। लोगों में मान्यता है कि ऐसा करने से जादू-टोने का असर खत्म हो जाता है। बताया कि शुक्रवार को कोढ़ी पंचायत घर के पास स्थित काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अतिथियों को पगड़ी पहनाई गई। साथ ही राजवंश के समय से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए पौराणिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जातर ऐतिहासिक चंद्रशेखर मंदिर पहुंची। यहां पर भी पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद सुहाली नृत्य प्रस्तुत किया गया। सायं चार बजे शिव गूर नाचता है और विभिन्न मनोकामनाएं लेकर आने वाले लोगों को आशीर्वाद आशीर्वाद देता है।
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