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Chamba News: मौसम की बेरुखी से उजड़ने की कगार पर सेब के बाग
Sun, 28 Dec 2025 04:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 28 Dec 2025 04:30 AM IST
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बागवानी पर संकट: चिलिंग आवर्स पूरे न होने से सूख रहे पौधे
लाखों का निवेश और बागवानों की उम्मीदें खतरे में
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मौसम की बेरुखी से जिले में सेब के बगीचे उजड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं। बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम की बेरुखी और चिलिंग आवर्स पूरे न होने के कारण बगीचों में फलदार पौधे सूखने लगे हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो लाखों रुपये का निवेश और बागवानों की सारी उम्मीदें खतरे में पड़ जाएंगी। सेब की बागबानी में पौधों को पर्याप्त चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है, ताकि फल अच्छे आकार के और गुणवत्ता वाले हों। इस बार मौसम सामान्य से गर्म रहने और ठंड के पर्याप्त घंटे न मिलने के कारण फल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
बागवानों संजीव कुमार, लोकियानंद, हेम राज, दीपक कुमार, रवि कुमार, टेक चंद का कहना है कि इस समय वे बगीचों में कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं। जिन बागवानों ने तीन से पांच साल पहले सेब के पौधे लगाए है, उनमें फल आने का समय हो गया है लेकिन मौसम की वजह से फल आने की संभावना कम ही लग रही है। बताया कि कई पौधे सूखने लगे हैं, बागबानी में सालों का अनुभव और भारी निवेश लगा है, लेकिन मौसम की बेरुख़ी के कारण उनकी मेहनत बेकार हो सकती है।
इनसेट
बिना बारिश के बागवानों के लिए मुश्किल है लेकिन जहां पानी की सुविधा है वहां बगीचों तक पानी पहुंचाने की कोशिश करें। जब तक बारिश नहीं होती तब तक नए पौधों के लिए गड्ढे खोदने का कार्य करते रहें। डॉ. प्रमोद शाह, उद्यान विभाग के उपनिदेशक
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लाखों का निवेश और बागवानों की उम्मीदें खतरे में
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मौसम की बेरुखी से जिले में सेब के बगीचे उजड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं। बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम की बेरुखी और चिलिंग आवर्स पूरे न होने के कारण बगीचों में फलदार पौधे सूखने लगे हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो लाखों रुपये का निवेश और बागवानों की सारी उम्मीदें खतरे में पड़ जाएंगी। सेब की बागबानी में पौधों को पर्याप्त चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है, ताकि फल अच्छे आकार के और गुणवत्ता वाले हों। इस बार मौसम सामान्य से गर्म रहने और ठंड के पर्याप्त घंटे न मिलने के कारण फल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
बागवानों संजीव कुमार, लोकियानंद, हेम राज, दीपक कुमार, रवि कुमार, टेक चंद का कहना है कि इस समय वे बगीचों में कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं। जिन बागवानों ने तीन से पांच साल पहले सेब के पौधे लगाए है, उनमें फल आने का समय हो गया है लेकिन मौसम की वजह से फल आने की संभावना कम ही लग रही है। बताया कि कई पौधे सूखने लगे हैं, बागबानी में सालों का अनुभव और भारी निवेश लगा है, लेकिन मौसम की बेरुख़ी के कारण उनकी मेहनत बेकार हो सकती है।
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बिना बारिश के बागवानों के लिए मुश्किल है लेकिन जहां पानी की सुविधा है वहां बगीचों तक पानी पहुंचाने की कोशिश करें। जब तक बारिश नहीं होती तब तक नए पौधों के लिए गड्ढे खोदने का कार्य करते रहें। डॉ. प्रमोद शाह, उद्यान विभाग के उपनिदेशक
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