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जिला में एक तिहाई हुई सेब की पैदावार, बागवान परेशान
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चंबा। जिले में मौसम की मार के कारण इस बार सेब की फसल
मात्र एक तिहाई की रह गई है। इससे सेब बेचकर परिवारों का भरण-पोषण करने वाले बागवानों को झटका लगा है।
जिले में सेब की पैदावार बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार 19 हजार मीट्रिक टन होने का अनुमान है। जबकि वर्ष 2019 में जिले में 25 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई थी। दस जुलाई से जिले के मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सेब की फसल तैयार हो गई है और उसे बागवान मंडियों में पहुंचा रहे हैं।
बतातें चलें कि जिले के भरमौर, सलूणी, चंबा, तीसा और पांगी में दो हजार बागवान सेब की फसल उगाकर ही अपना करते हैं। ऐसे में इस बार मौसम की मार बागवानों पर पड़ रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जिले में गत वर्ष की अपेक्षा एक तिहाई सेब की पैदावार होना हैं।
बागवानी विभाग के अधिकारी सेब की एक वर्ष अच्छी पैदावार होने के बाद दूसरे वर्ष कम पैदावार होने की बात कह रहे हैं। वहीं, सेब की कम पैदावार ने बागवानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
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हैरानी की बात है कि जिले में तैयार होने वाले सेब को बागवानों को अपने स्तर पर ही बाहरी राज्यों की मंडियों तक पहुंचाने की जिम्मेवारी रहती है।
जिले के भरमौर, सलूणी, तीसा, चंबा और पांगी में बागवान सेब की पैदावार करते हैं। बागवानी विभाग के मुताबिक जिले में 15 जुलाई से 28 जुलाई तक सेब सीजन चलता है। अभी तक मात्र 50 मीट्रिक टन की सेब बाहरी मंडियों तक पहुंचाया जा चुका है। जोकि, पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है।
इन मंडियो में बेचा जाता है चंबा का सेब
चंबा जिले के बागवान पठानकोट, मुंबई, अमृतसर, पठानकोट, दिल्ली और चंडीगढ़ की मंडियों में सेब बेचते हैं।
जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि जिले में सेब की पैदावार बीते वर्ष की अपेक्षा एक तिहाई कम हुई हैं। पिछले वर्ष 35 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई। एक वर्ष अच्छी पैदावार के बाद दूसरे वर्ष कम पैदावार होती है। लिहाजा, इस बार 19 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार होने की उम्मीद है।
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मात्र एक तिहाई की रह गई है। इससे सेब बेचकर परिवारों का भरण-पोषण करने वाले बागवानों को झटका लगा है।
जिले में सेब की पैदावार बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार 19 हजार मीट्रिक टन होने का अनुमान है। जबकि वर्ष 2019 में जिले में 25 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई थी। दस जुलाई से जिले के मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सेब की फसल तैयार हो गई है और उसे बागवान मंडियों में पहुंचा रहे हैं।
बतातें चलें कि जिले के भरमौर, सलूणी, चंबा, तीसा और पांगी में दो हजार बागवान सेब की फसल उगाकर ही अपना करते हैं। ऐसे में इस बार मौसम की मार बागवानों पर पड़ रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जिले में गत वर्ष की अपेक्षा एक तिहाई सेब की पैदावार होना हैं।
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बागवानी विभाग के अधिकारी सेब की एक वर्ष अच्छी पैदावार होने के बाद दूसरे वर्ष कम पैदावार होने की बात कह रहे हैं। वहीं, सेब की कम पैदावार ने बागवानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
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हैरानी की बात है कि जिले में तैयार होने वाले सेब को बागवानों को अपने स्तर पर ही बाहरी राज्यों की मंडियों तक पहुंचाने की जिम्मेवारी रहती है।
जिले के भरमौर, सलूणी, तीसा, चंबा और पांगी में बागवान सेब की पैदावार करते हैं। बागवानी विभाग के मुताबिक जिले में 15 जुलाई से 28 जुलाई तक सेब सीजन चलता है। अभी तक मात्र 50 मीट्रिक टन की सेब बाहरी मंडियों तक पहुंचाया जा चुका है। जोकि, पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है।
इन मंडियो में बेचा जाता है चंबा का सेब
चंबा जिले के बागवान पठानकोट, मुंबई, अमृतसर, पठानकोट, दिल्ली और चंडीगढ़ की मंडियों में सेब बेचते हैं।
जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि जिले में सेब की पैदावार बीते वर्ष की अपेक्षा एक तिहाई कम हुई हैं। पिछले वर्ष 35 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई। एक वर्ष अच्छी पैदावार के बाद दूसरे वर्ष कम पैदावार होती है। लिहाजा, इस बार 19 हजार मीट्रिक टन सेब की पैदावार होने की उम्मीद है।