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Chamba: मदद नहीं मिलने पर बच्चों समेत अनशन पर बैठ गए प्रभावित

Fri, 07 Oct 2022 11:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिहुंता (चंबा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिहुंता (चंबा) Published by: शिमला ब्यूरो Updated Fri, 07 Oct 2022 11:40 PM IST
सार

 प्रभावितों का कहना है कि भारी बारिश के कारण 42 परिवारों से आशियाने छिन चुके हैं। प्रभावितों ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाया है कि भारी जलप्रवाह में सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों को न तो कोई मकान बनाने के लिए जगह मुहैया करवाई गई है

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Affected people sat on fast along with children due to lack of help in chamba
ककरोटी घट्टा में क्रमिक अनशन पर बैठ प्रभावित परिवारों के सदस्य। - फोटो : संवाद

विस्तार

आसमान से बरपे कहर के 47 दिन बाद भी किसी प्रकार की मदद न मिलने से गुस्साए प्रभावित अपने परिवारों और बच्चों समेत ककरोटी घट्टा में शुक्रवार सुबह 9:00 बजे अनशन पर बैठ गए। प्रभावितों का कहना है कि भारी बारिश के कारण 42 परिवारों से आशियाने छिन चुके हैं। प्रभावितों ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाया है कि भारी जलप्रवाह में सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों को न तो कोई मकान बनाने के लिए जगह मुहैया करवाई गई है

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और न ही उन्हें सहायता राशि दी गई है जिससे वे अपने उजड़े आशियाने दोबारा बसा सकें। प्रभावितों ने शासन और प्रशासन को दो दिन के भीतर मकान बनाने के लिए जमीन मुहैया करवाने और सहायता राशि देने का अल्टीमेटम दिया है। ऐसा न होने की सूरत में ग्रामीण ककरोटी घट्टा में चक्का जाम कर देंगे। ग्रामीणों के चक्का जाम करने से चंबा-शिमला, चंबा-कांगड़ा, चुवाड़ी-चंबा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर ब्रेक लग सकती है।
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हमारे परिवार के सिर पर छत तक नहीं है। मजबूरन टेंटों में रहकर प्रभावित समय गुजार रहे हैं। प्रशासन की ओर से सहायता के महज आश्वासन ही दिए गए हैं जिससे वे स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। - सुभद्रु देवी, प्रभावित।
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ककरोटी घट्टा में आसमान से बरपे कहर से मकानों को जाने वाले रास्ते पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में उनके मवेशी क्षतिग्रस्त घरों में हैं। इससे उन्हें जान पर खेल कर मवेशियों को घास खिलाने के लिए जाना पड़ता है।-सुमना देवी, प्रभावित।

क्षेत्र में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर समेत शासन और प्रशासन की टीमें तो पहुंचीं लेकिन अभी तक उन्हें सहायता राशि और क्षतिग्रस्त मकानों को बनाने के लिए मदद नहीं मिल पाई है। - शकुंतला देवी, प्रभावित।

क्षेत्र में मची भारी तबाही के 47 दिन उन्होंने जैसे-तैसे गुजारे हैं। लेकिन अब आने वाले दिनों में सर्दियां बढ़ने वाली हैं। इससे उन्हें अपने परिवारों की चिंता सताने लगी है। - वीना देवी, प्रभावित


प्रभावितों को हुए नुकसान की एवज में उचित आकलन तैयार कर भूमिहीन प्रभावितों को जमीन प्रदान करने के बारे में प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया है। सरकार के निर्देशानुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। ग्रामीणों के चक्का जाम करने की सूचना मिलने पर तहसीलदार को मौके पर भेजा गया है। - सुनील कायथ, उपमंडल अधिकारी चुवाड़ी।

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