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Chamba News: एक साल बाद दर्द ने खोला ऑपरेशन का राज
Mon, 28 Sep 2026 10:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 28 Sep 2026 10:17 PM IST
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ऑपरेशन के बाद पेट में छूटी सर्जिकल सामग्री, दो डॉक्टरों को 5.12 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
सीईसीटी में सामने आया 8×8 सेंटीमीटर का संग्रह, दोबारा सर्जरी कर पेट से निकाली गई विदेशी सामग्री
मुआवजे के साथ नौ प्रतिशत ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। ऑपरेशन के करीब एक साल बाद फिर उठा तेज पेट दर्द आखिरकार उस लापरवाही तक पहुंचा, जो पहली सर्जरी के दौरान हुई थी।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा ने मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, बद्दी में हुई सर्जरी के मामले में दो चिकित्सकों को शिकायतकर्ता राकेश कुमार को 5,12,026 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
डलहौजी तहसील के दुहका निवासी राकेश को 29 जुलाई 2019 को पेट दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। पित्ताशय में पथरी मिलने पर ऑपरेशन किया गया और तीन अगस्त को छुट्टी दे दी गई। करीब एक साल बाद सितंबर 2020 में दोबारा तेज दर्द हुआ। चंडीगढ़ में 13 सितंबर को हुई सीईसीटी जांच में पित्ताशय के नीचे करीब 8×8 सेंटीमीटर का संग्रह मिला। इसमें हवा के छोटे बिंदुओं के साथ टांके की सामग्री दिखाई दी। पठानकोट में अल्ट्रासाउंड के बाद गॉसिपिबोमा की आशंका जताई गई।
इसके बाद पंचकूला के धवन अस्पताल में एक अक्तूबर को दोबारा सर्जरी कर पेट से विदेशी सामग्री निकाली गई। आयोग ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि पहली सर्जरी के दौरान सामग्री पेट में रह गई थी। इसे स्वीकार्य चिकित्सकीय मानकों से गंभीर विचलन और सेवा में कमी माना गया। राकेश ने 6,52,026 रुपये का दावा किया था। आयोग ने दस्तावेजों के आधार पर 5,12,026 रुपये मुआवजा तय किया। दोनों चिकित्सकों को राशि संयुक्त और पृथक रूप से चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने 24 सितंबर 2026 को यह आदेश सुनाया।
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यह होता है गॉसिपिबोमा
गॉसिपिबोमा उस स्थिति को कहा जाता है, जब ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई गॉज या अन्य सर्जिकल सामग्री गलती से शरीर के अंदर रह जाती है। इसके आसपास गांठ या सूजन बन सकती है।
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सीईसीटी में सामने आया 8×8 सेंटीमीटर का संग्रह, दोबारा सर्जरी कर पेट से निकाली गई विदेशी सामग्री
मुआवजे के साथ नौ प्रतिशत ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। ऑपरेशन के करीब एक साल बाद फिर उठा तेज पेट दर्द आखिरकार उस लापरवाही तक पहुंचा, जो पहली सर्जरी के दौरान हुई थी।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा ने मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, बद्दी में हुई सर्जरी के मामले में दो चिकित्सकों को शिकायतकर्ता राकेश कुमार को 5,12,026 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
डलहौजी तहसील के दुहका निवासी राकेश को 29 जुलाई 2019 को पेट दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। पित्ताशय में पथरी मिलने पर ऑपरेशन किया गया और तीन अगस्त को छुट्टी दे दी गई। करीब एक साल बाद सितंबर 2020 में दोबारा तेज दर्द हुआ। चंडीगढ़ में 13 सितंबर को हुई सीईसीटी जांच में पित्ताशय के नीचे करीब 8×8 सेंटीमीटर का संग्रह मिला। इसमें हवा के छोटे बिंदुओं के साथ टांके की सामग्री दिखाई दी। पठानकोट में अल्ट्रासाउंड के बाद गॉसिपिबोमा की आशंका जताई गई।
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इसके बाद पंचकूला के धवन अस्पताल में एक अक्तूबर को दोबारा सर्जरी कर पेट से विदेशी सामग्री निकाली गई। आयोग ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद माना कि पहली सर्जरी के दौरान सामग्री पेट में रह गई थी। इसे स्वीकार्य चिकित्सकीय मानकों से गंभीर विचलन और सेवा में कमी माना गया। राकेश ने 6,52,026 रुपये का दावा किया था। आयोग ने दस्तावेजों के आधार पर 5,12,026 रुपये मुआवजा तय किया। दोनों चिकित्सकों को राशि संयुक्त और पृथक रूप से चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने 24 सितंबर 2026 को यह आदेश सुनाया।
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यह होता है गॉसिपिबोमा
गॉसिपिबोमा उस स्थिति को कहा जाता है, जब ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई गॉज या अन्य सर्जिकल सामग्री गलती से शरीर के अंदर रह जाती है। इसके आसपास गांठ या सूजन बन सकती है।