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जिले में पहली मर्तबा आरटीजीएस के तहत खाते में पड़ेगा मेहनताना
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:02 PM IST
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कारीगरों के बैंक खाते में आएगा मेहनताना
जिले में हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा ने शुरू की पहल
मेटलिंग का प्रशिक्षण ले रहे 40 कारीगरों को मिलेगा लाभ
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। जिले में पहली मर्तबा प्रशिक्षण हासिल कर रहे कारीगरों के बैंक खाते में उनकी दिहाड़ी (मेहनताना) पड़ेगी। हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन ने इस प्रकार की पहल शुरू की है। ऐतिहासिक रंगमहल चंबा में मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण हासिल कर रहे 40 कारीगरों को इसका लाभ मिलेगा। दिहाड़ी बैंक खाते में पड़ने से उन्हें बार-बार कारपोरेशन कार्यालय के चक्कर काटने से निजात मिलेगी।
गौरतलब हो कि वस्त्र मंत्रालय दिल्ली के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन कुसुम्पटी शिमला के सौजन्य से रंगमहल में स्थित हैंडलूम/हैंडक्राफ्ट कारपोरेशन के कार्यालय में जिले के मेटल क्राफ्ट के कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इंटर ग्रेटिड डिजाइन एंड टेक्निकल प्रोजेक्ट इन मेटल क्राफ्ट नामक इस प्रशिक्षण में कारीगरों को मेटल क्राफ्ट की बारीकियों बारे जानकारियां प्रदान करवाई जा रही हैं। हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन ने पहली मर्तबा प्रशिक्षण हासिल कर रहे कारीगरों की दिहाड़ी का भुगतान आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रोस सेटलमेंट) के जरिये करने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण हासिल करने वाले प्रशिक्षुओं, कारीगरों की दिहाड़ी का भुगतान संबंधित कारपोरेशन कार्यालय से ही किया जाता था।
मेटल क्राफ्ट बारे प्रशिक्षण आरंभ होने से पूर्व समस्त कारीगरों से उनके शैक्षणिक, बैंक संबंधी दस्तावेज लिए गए थे। इसका मकसद कारीगरों की दिहाड़ी उनके बैंक खाते में डालना था।
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बाक्स
रंगमहल में 40 कारीगर हासिल कर रहे प्रशिक्षण
रंगमहल स्थित हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन कार्यालय में 40 कारीगरों को मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रति दिन के हिसाब से एक कारीगर को 300 रुपये मेहनताना मिलता है। इसके अलावा मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण दे रहे इंस्ट्रक्टर को तीन माह तक प्रशिक्षण देने की एवज में 30 हजार रुपये मेहनताना मिलेगा।
हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के प्रभारी कविंद्र कुमार ने बताया कि यह पहली बार है कि प्रशिक्षण हासिल करने वाले कारीगरों की दिहाड़ी उनके बैंक खाते में आरटीजीएस के तहत पड़ेगी। रंगमहल में स्थित कारपोरेशन के कार्यालय में 40 कारीगर प्रशिक्षण ले रहे हैं। आरटीजीएस के जरिये दिहाड़ी का भुगतान होने से कारीगरों को लाभ मिलेगा।
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जिले में हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा ने शुरू की पहल
मेटलिंग का प्रशिक्षण ले रहे 40 कारीगरों को मिलेगा लाभ
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। जिले में पहली मर्तबा प्रशिक्षण हासिल कर रहे कारीगरों के बैंक खाते में उनकी दिहाड़ी (मेहनताना) पड़ेगी। हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन ने इस प्रकार की पहल शुरू की है। ऐतिहासिक रंगमहल चंबा में मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण हासिल कर रहे 40 कारीगरों को इसका लाभ मिलेगा। दिहाड़ी बैंक खाते में पड़ने से उन्हें बार-बार कारपोरेशन कार्यालय के चक्कर काटने से निजात मिलेगी।
गौरतलब हो कि वस्त्र मंत्रालय दिल्ली के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन कुसुम्पटी शिमला के सौजन्य से रंगमहल में स्थित हैंडलूम/हैंडक्राफ्ट कारपोरेशन के कार्यालय में जिले के मेटल क्राफ्ट के कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इंटर ग्रेटिड डिजाइन एंड टेक्निकल प्रोजेक्ट इन मेटल क्राफ्ट नामक इस प्रशिक्षण में कारीगरों को मेटल क्राफ्ट की बारीकियों बारे जानकारियां प्रदान करवाई जा रही हैं। हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन ने पहली मर्तबा प्रशिक्षण हासिल कर रहे कारीगरों की दिहाड़ी का भुगतान आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रोस सेटलमेंट) के जरिये करने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण हासिल करने वाले प्रशिक्षुओं, कारीगरों की दिहाड़ी का भुगतान संबंधित कारपोरेशन कार्यालय से ही किया जाता था।
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मेटल क्राफ्ट बारे प्रशिक्षण आरंभ होने से पूर्व समस्त कारीगरों से उनके शैक्षणिक, बैंक संबंधी दस्तावेज लिए गए थे। इसका मकसद कारीगरों की दिहाड़ी उनके बैंक खाते में डालना था।
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रंगमहल में 40 कारीगर हासिल कर रहे प्रशिक्षण
रंगमहल स्थित हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन कार्यालय में 40 कारीगरों को मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रति दिन के हिसाब से एक कारीगर को 300 रुपये मेहनताना मिलता है। इसके अलावा मेटल क्राफ्ट का प्रशिक्षण दे रहे इंस्ट्रक्टर को तीन माह तक प्रशिक्षण देने की एवज में 30 हजार रुपये मेहनताना मिलेगा।
हैंडलूम/हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के प्रभारी कविंद्र कुमार ने बताया कि यह पहली बार है कि प्रशिक्षण हासिल करने वाले कारीगरों की दिहाड़ी उनके बैंक खाते में आरटीजीएस के तहत पड़ेगी। रंगमहल में स्थित कारपोरेशन के कार्यालय में 40 कारीगर प्रशिक्षण ले रहे हैं। आरटीजीएस के जरिये दिहाड़ी का भुगतान होने से कारीगरों को लाभ मिलेगा।