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38 कलस्टरों में बांटी जाएंगी जिले की 283 पंचायतें
Updated Tue, 20 Jun 2017 10:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। जिला बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए कार्य योजना तैयार की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि जिला की 283 पंचायतों को 38 कलस्टरों में बांटा गया। इसके तहत प्रत्येक पंचायत तक विभागीय स्कीमों को पहुंचाया जाएगा। जिला में नाबालिग, अनाथ बच्चे की संपत्ति की सुरक्षा के बारे में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 168 बच्चे खोजे जा चुके है। जिनमें से तीस बच्चों की संपत्ति संबंधी जानकारी हासिल की जा चुकी है। जिला आश्रम कल्याण समिति में दान का पैसा भी आना शुरू हो गया है। अब तक करीब 31 हजार रुपये मात्र जमा कर दिए गए हैं। बाल विवाह व बाल मजदूूरी पर रोक लगाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। समिति की ओर से मिंजर मेले में भी स्टॉल लगाने के लिए अनुमित मांगी गई है। देखरेख संस्थानों में मासिक स्वास्थ्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन कुछ संस्थानों में चिकित्सक नहीं मिल पा रहे हैं। अब तक छह बच्चों ने शिमला में हुई काउंसलिंग में भी हिस्सा लिया है। देख-रेख संस्थानों में ट्यूशन टीचर की दरकार है। समिति ने ट्यूशन टीचर की नियुक्ति करने की मांग भी उपायुक्त के समक्ष रखी। नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट की स्थापना करने का भी आग्रह समिति ने उपायुक्त से किया।
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चंबा। जिला बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए कार्य योजना तैयार की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि जिला की 283 पंचायतों को 38 कलस्टरों में बांटा गया। इसके तहत प्रत्येक पंचायत तक विभागीय स्कीमों को पहुंचाया जाएगा। जिला में नाबालिग, अनाथ बच्चे की संपत्ति की सुरक्षा के बारे में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 168 बच्चे खोजे जा चुके है। जिनमें से तीस बच्चों की संपत्ति संबंधी जानकारी हासिल की जा चुकी है। जिला आश्रम कल्याण समिति में दान का पैसा भी आना शुरू हो गया है। अब तक करीब 31 हजार रुपये मात्र जमा कर दिए गए हैं। बाल विवाह व बाल मजदूूरी पर रोक लगाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। समिति की ओर से मिंजर मेले में भी स्टॉल लगाने के लिए अनुमित मांगी गई है। देखरेख संस्थानों में मासिक स्वास्थ्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन कुछ संस्थानों में चिकित्सक नहीं मिल पा रहे हैं। अब तक छह बच्चों ने शिमला में हुई काउंसलिंग में भी हिस्सा लिया है। देख-रेख संस्थानों में ट्यूशन टीचर की दरकार है। समिति ने ट्यूशन टीचर की नियुक्ति करने की मांग भी उपायुक्त के समक्ष रखी। नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट की स्थापना करने का भी आग्रह समिति ने उपायुक्त से किया।