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ोशनी का त्योहार मनाने से ठीक एक दिन पहले दो परिवार हुए बेघर
Updated Tue, 06 Nov 2018 07:24 PM IST
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रोशनी का त्योहार मनाने से एक दिन पहले बेेघर हुए दो परिवार
सोमवार आधी रात मकान में लगी आग ने प्रभावितों के सिर से छीना आसरा
मकान में लगी आग की लपटों में ही दीवाली मनाने की चाहत भी हुई स्वाह
कपिल डोगरा
चुवाड़ी (चंबा)। रोशनी का त्योहार दीवाली बड़े उत्साह और उमंग से मनाने की सोच रहे अशोक, रोशन और किशोरी और उनके परिवार एक दिन पहले ही बेघर हो गए। सोमवार आधी रात को होने वाले अग्निकांड में उनका मकान जलने से अब प्रभावितों को सिर छिपाने के लिए भी आसरा लेना पड़ रहा है। इस अग्निकांड ने इन परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे गई है।
गौरतलब हो कि तलाई निवासी अशोक कुमार पत्नी स्वर्णा देवी और दो बच्चों मिनाक्षी (19 वर्षीय), अभिनय (16 वर्ष), किशोरी पत्नी बबली देवी, सात वर्षीय पायल और निरंजना के साथ मकान में रहते थे। इतना ही नहीं, इस पुश्तैनी मकान में उनके भाई रोशन का भी सारा सामान रखा था। अशोक, किशोरी की माता दूसरे बेटे रोशन के साथ कूट में मकान में ही रहती थी। सोमवार आधी रात के बाद अचानक उठी आग की लपटों ने देेखते ही देखते उनके बच्चों के खुशी-खुशी दीवाली त्योहार मनाने के सपनों को पल भर में धूमिल करके रख दिया। रोशनी का त्योहार मनाने और उसके लिए सजावट करने की सोच रहे परिवार के बच्चों के अरमान अब अरमान ही बन कर रह गए हैं।
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सोमवार आधी रात मकान में लगी आग ने प्रभावितों के सिर से छीना आसरा
मकान में लगी आग की लपटों में ही दीवाली मनाने की चाहत भी हुई स्वाह
कपिल डोगरा
चुवाड़ी (चंबा)। रोशनी का त्योहार दीवाली बड़े उत्साह और उमंग से मनाने की सोच रहे अशोक, रोशन और किशोरी और उनके परिवार एक दिन पहले ही बेघर हो गए। सोमवार आधी रात को होने वाले अग्निकांड में उनका मकान जलने से अब प्रभावितों को सिर छिपाने के लिए भी आसरा लेना पड़ रहा है। इस अग्निकांड ने इन परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे गई है।
गौरतलब हो कि तलाई निवासी अशोक कुमार पत्नी स्वर्णा देवी और दो बच्चों मिनाक्षी (19 वर्षीय), अभिनय (16 वर्ष), किशोरी पत्नी बबली देवी, सात वर्षीय पायल और निरंजना के साथ मकान में रहते थे। इतना ही नहीं, इस पुश्तैनी मकान में उनके भाई रोशन का भी सारा सामान रखा था। अशोक, किशोरी की माता दूसरे बेटे रोशन के साथ कूट में मकान में ही रहती थी। सोमवार आधी रात के बाद अचानक उठी आग की लपटों ने देेखते ही देखते उनके बच्चों के खुशी-खुशी दीवाली त्योहार मनाने के सपनों को पल भर में धूमिल करके रख दिया। रोशनी का त्योहार मनाने और उसके लिए सजावट करने की सोच रहे परिवार के बच्चों के अरमान अब अरमान ही बन कर रह गए हैं।
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