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Chamba News: चुराह के 15 गांवों के 30 किसानों को मिले मशरूम के 100-100 बैग
Tue, 03 Feb 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 03 Feb 2026 10:40 PM IST
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चुराह (चंबा)। उपमंडल चुराह के 15 गांवों के 30 किसान अब मशरूम उत्पादन के माध्यम से अपनी आय में इजाफा करेंगे। द हंस फाउंडेशन द्वारा पूर्व में करवाई गई मशरूम उत्पादन की प्रशिक्षण प्रक्रिया के बाद अब एलआईसी एचएफएल हृदय परियोजना के तहत 100-100 मशरूम खाद बैग सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गई है।
इससे पहले फाउंडेशन की ओर से किसानों को मशरूम विकास परियोजना केंद्र, पालमपुर (जिला कांगड़ा) में पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिलवाया गया था। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत अब संस्था द्वारा आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवा कर उत्पादन कार्य शुरू करवाया गया है, ताकि प्रशिक्षण का सीधा लाभ किसानों की आमदनी में दिखाई दे सके।
इस योजना के तहत चुराह विधानसभा क्षेत्र के जुंगरा, दूदरा, सगलोगा, सालांचा, बुइन, तीसा, शिकारी नैरा, धनेली, पधर सहित अन्य गांवों के किसानों को 15 प्रतिशत भागीदारी पर योजना से जोड़ा गया है।
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परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार एक मशरूम खाद बैग से न्यूनतम दो किलोग्राम तक उत्पादन संभव है, जिससे 100 बैग से किसानों को अच्छी आमदनी होने की संभावना जताई जा रही है। एलआईसी एचएफएल हृदय परियोजना के कार्यक्रम समन्वयक रितिक ठाकुर और विषय वस्तु विशेषज्ञ रोहित राठौर ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद किसानों को सीधे उत्पादन से जोड़ना ही परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इस पहल से चुराह विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
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इससे पहले फाउंडेशन की ओर से किसानों को मशरूम विकास परियोजना केंद्र, पालमपुर (जिला कांगड़ा) में पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिलवाया गया था। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत अब संस्था द्वारा आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवा कर उत्पादन कार्य शुरू करवाया गया है, ताकि प्रशिक्षण का सीधा लाभ किसानों की आमदनी में दिखाई दे सके।
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इस योजना के तहत चुराह विधानसभा क्षेत्र के जुंगरा, दूदरा, सगलोगा, सालांचा, बुइन, तीसा, शिकारी नैरा, धनेली, पधर सहित अन्य गांवों के किसानों को 15 प्रतिशत भागीदारी पर योजना से जोड़ा गया है।
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परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार एक मशरूम खाद बैग से न्यूनतम दो किलोग्राम तक उत्पादन संभव है, जिससे 100 बैग से किसानों को अच्छी आमदनी होने की संभावना जताई जा रही है। एलआईसी एचएफएल हृदय परियोजना के कार्यक्रम समन्वयक रितिक ठाकुर और विषय वस्तु विशेषज्ञ रोहित राठौर ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद किसानों को सीधे उत्पादन से जोड़ना ही परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इस पहल से चुराह विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।