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लैब तकनीशियनों ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 का किया विरोध
Updated Tue, 05 Sep 2017 09:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। हिमाचल प्रदेश प्रोफेशनल मेडिकल तकनीशियन एसोसिएशन इकाई चंबा की बैठक प्रधान आशा देवी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लैब तकनीशियनों ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 का विरोध किया। एसोसिएशन ने प्रदेश व केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उपरोक्त एक्ट को समाप्त करके स्वतंत्र काम करने का अधिकार मिलना चाहिए। इकाई प्रधान आशा देवी ने कहा कि 8-9 महीनों से पूरे प्रदेश में इस एक्ट की वजह से सभी लैब तकनीशियन परेशान हैं। एक्ट के अनुसार हरेक लैब में एक एमबीबीएस डॉक्टर का होना जरूरी है। लैब की सभी टेस्ट रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर के हस्ताक्षर होंगे। एक लैब में डॉक्टर का कोई काम नहीं है। किसी लैब तकनीशियन की एक एमबीबीएस डॉक्टर को रखने की हिम्मत नहीं हो रही है। क्योंकि एक एमबीबीएस डॉक्टर को सिर्फ हस्ताक्षर करने की एवज में मोटी रकम अदा करना किसी भी लैब तकनीशियन के बस की बात नहीं है। चंबा के भौगोलिक स्थिति के अनुसार यहां एमबीबीएस डॉक्टर का उपलब्ध होना मुश्किल है। टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। इस अवसर पर जिला ऊना इकाई के प्रधान सतीश कुमार, सचिव विपन कुमार, शांति जरयाल, तिलक जरयाल, काका राम, राजीव, गौरव कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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चंबा। हिमाचल प्रदेश प्रोफेशनल मेडिकल तकनीशियन एसोसिएशन इकाई चंबा की बैठक प्रधान आशा देवी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लैब तकनीशियनों ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 का विरोध किया। एसोसिएशन ने प्रदेश व केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उपरोक्त एक्ट को समाप्त करके स्वतंत्र काम करने का अधिकार मिलना चाहिए। इकाई प्रधान आशा देवी ने कहा कि 8-9 महीनों से पूरे प्रदेश में इस एक्ट की वजह से सभी लैब तकनीशियन परेशान हैं। एक्ट के अनुसार हरेक लैब में एक एमबीबीएस डॉक्टर का होना जरूरी है। लैब की सभी टेस्ट रिपोर्ट पर एमबीबीएस डॉक्टर के हस्ताक्षर होंगे। एक लैब में डॉक्टर का कोई काम नहीं है। किसी लैब तकनीशियन की एक एमबीबीएस डॉक्टर को रखने की हिम्मत नहीं हो रही है। क्योंकि एक एमबीबीएस डॉक्टर को सिर्फ हस्ताक्षर करने की एवज में मोटी रकम अदा करना किसी भी लैब तकनीशियन के बस की बात नहीं है। चंबा के भौगोलिक स्थिति के अनुसार यहां एमबीबीएस डॉक्टर का उपलब्ध होना मुश्किल है। टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। इस अवसर पर जिला ऊना इकाई के प्रधान सतीश कुमार, सचिव विपन कुमार, शांति जरयाल, तिलक जरयाल, काका राम, राजीव, गौरव कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।