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आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर ग्रामीणों से ठगी
Updated Wed, 04 Apr 2018 10:43 PM IST
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- फोटो : demo pics
अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। भरमौर के सामरा और रूहनूकोठी में प्रवासी महिलाएं आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर लोगों से ठगी कर रही हैं। प्रवासी महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बांझपन, अधरंग और चर्म रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों की देसी दवाएं बेच रही हैं। जबकि उनके पास दवाइयां बेचने का लाइसेंस तक नहीं है। फिर भी महिलाएं लोगों को विभिन्न बीमारियों की दवाइयां बेच रही हैं।
अभी तक दर्जनों ग्रामीण महिलाओं के झांसे में आ चुके हैं। आयुर्वेदिक दवाइयों के नाम पर लोगों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव देख प्रवासी महिलाएं इसका नाजायज फायदा उठा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन महिलाओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग को महिलाओं द्वारा बेची जाने वाली दवाइयों की जांच करनी चाहिए। ताकि लोगों की सेहत पर इसका बुरा असर नहीं पड़े।
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ग्रामीण देसराज, जीतराम, आत्माराम, मचलू राम, सुनील कुमार, इंदु बाला, राकेश कुमार, हंसराज और सोमराज ने बताया कि सामरा और रूहनूकोठी में इन दिनों दो प्रवासी महिलाएं वैद्य बनकर लोगों को दवाइयां बेच रही हैं। यह महिलाएं इतनी शातिर हैं कि लोग बीमारी से राहत पाने के लिए उनके झांसे में फंस रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि महिलाएं दूरदराज के गांव में घूमती रहती हैं।
इस दौरान हर घर में जाकर बीमारियों के बारे में पूछती रहती हैं। अगर कोई बीमारी से ग्रसित उनके संपर्क में आता है तो उसे शर्तिया इलाज का झांसा देकर दवाइयां बेच जाती हैं। इसके बाद महिलाएं दोबारा उस गांव में लौट कर नहीं जाती। यह सिलसिला कई दिनों से भरमौर की दूरदराज की पंचायतों में चल रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि महिलाओं को पकड़कर उनके लाइसेंस की जांच की जाए। इसके साथ ही उनकी दवाइयों की गुणवत्ता भी जांची जाए।
मामले की गंभीरता से की जाएगी जांच : वाइडी शर्मा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है। अगर सच में ऐसा हो रहा है तो इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर महिलाओं पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।