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सड़क सुविधा के लिए तरस रहे किलोड़ पंचायत के एक दर्जन गांव
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:14 PM IST
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- फोटो : demo pic
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अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। विकास खंड मैहला के तहत ग्राम पंचायत किलोड़ के एक दर्जन गांव आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर वह कई बार प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग से मांग कर चुके हैं। मगर अभी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से पंचायत के गांव कल्मला, लौग्रां, पड़, पनाड़, उड़प्पा, पलेंण, द्रमणु, चलेज, टिपरैड़ा, ढढली, सपोग और नागवण के ग्रामीण आज भी सड़क से कोसों दूर हैं। हालत यह है कि मजबूरी में लोगों को मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पालकी पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन गांवों की आबादी करीब 1500 है। ग्रामीणों को रोजाना सड़क तक पहुंचने के लिए आठ से नौ किलोमीटर तक का पैदल सफर तय करना पड़ता है। इसके अलावा घर का जरूरी सामान भी पीठ पर उठाकर घर पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीण पवन कुमार, विनोद कुमार, शिव कुमार, विरेंद्र कुमार, सन्नी राम, राकेश जरयाल, सोनू राम, राकेश कुमार, शिव कुमार, आत्मा राम, मुकेश शर्मा, अजय कुमार, मनिषा देवी, रामेश , सुरेंद्र, देविंद्र, आकाश, मोनिका, काव्य कुमारी, देशराज, भगत सिंह और हंसराज ने बताया कि सड़क न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें गृह निर्माण सामग्री और गांवों से बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में आती है। सड़क का निर्माण न होने के चलते जहां मरीजों को पालकी के से मुख्य सड़क तक पहुंचाने को ग्रामीण मजबूर है तो वहीं कोई भी सरकारी सेवा का उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि चुनावों के दौरान नेता सड़क निर्माण का वायदा कर जाते हैं। मगर चुनाव जीत जाने के बाद उनके साथ किया वायदा भूल जाते हैं। अब तक सड़क निर्माण को लेकर नेताओं और अधिकारियों से ग्रामीणों को महज आश्वासन ही मिलते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके गांवों के लिए सड़क का निर्माण किया जाए।
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चंबा। विकास खंड मैहला के तहत ग्राम पंचायत किलोड़ के एक दर्जन गांव आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर वह कई बार प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग से मांग कर चुके हैं। मगर अभी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से पंचायत के गांव कल्मला, लौग्रां, पड़, पनाड़, उड़प्पा, पलेंण, द्रमणु, चलेज, टिपरैड़ा, ढढली, सपोग और नागवण के ग्रामीण आज भी सड़क से कोसों दूर हैं। हालत यह है कि मजबूरी में लोगों को मरीजों और गर्भवती महिलाओं को पालकी पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन गांवों की आबादी करीब 1500 है। ग्रामीणों को रोजाना सड़क तक पहुंचने के लिए आठ से नौ किलोमीटर तक का पैदल सफर तय करना पड़ता है। इसके अलावा घर का जरूरी सामान भी पीठ पर उठाकर घर पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीण पवन कुमार, विनोद कुमार, शिव कुमार, विरेंद्र कुमार, सन्नी राम, राकेश जरयाल, सोनू राम, राकेश कुमार, शिव कुमार, आत्मा राम, मुकेश शर्मा, अजय कुमार, मनिषा देवी, रामेश , सुरेंद्र, देविंद्र, आकाश, मोनिका, काव्य कुमारी, देशराज, भगत सिंह और हंसराज ने बताया कि सड़क न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें गृह निर्माण सामग्री और गांवों से बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में आती है। सड़क का निर्माण न होने के चलते जहां मरीजों को पालकी के से मुख्य सड़क तक पहुंचाने को ग्रामीण मजबूर है तो वहीं कोई भी सरकारी सेवा का उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि चुनावों के दौरान नेता सड़क निर्माण का वायदा कर जाते हैं। मगर चुनाव जीत जाने के बाद उनके साथ किया वायदा भूल जाते हैं। अब तक सड़क निर्माण को लेकर नेताओं और अधिकारियों से ग्रामीणों को महज आश्वासन ही मिलते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके गांवों के लिए सड़क का निर्माण किया जाए।