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मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन मरीजों को नहीं मिल रहा स्मार्ट कार्ड का लाभ
Updated Fri, 19 Jan 2018 09:21 PM IST
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चंबा। मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन मरीजों को स्मार्ट कार्ड का लाभ नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि प्रदेश सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा बार-बार चिकित्सकों को कॉलेज में मौजूद जेनरिक और सस्ती दवाइयां लिखने के बारे में निर्देश जारी किए जाते हैं। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज चंबा के कुछेक चिकित्सक इन निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज चंबा के औचक निरीक्षण करने पहुंचे सदर विधायक के समक्ष उपचाराधीन मरीजों ने इसकी पोल खोल कर ही रख दी।
अपने पैैसे से खरीदना पड़ा 35 हजार का शिकंजा: लेखराज
लेख राज निवासी बरौर ने बताया कि ढांक में गिरने से उनकी टांग टूट गई है। इसे जोड़ने के लिए डॉक्टर ने उन्हें शिकंजा लाने को कहा। इसकी कीमत 35 हजार रुपये है। स्मार्ट कार्ड होते हुए भी उन्हें शिकंजा अपने पैसे से खरीदना पड़ा। इसके अलावा दवाइयों पर अलग से खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड सिर्फ एक धोखा है। मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
ऐन मौके पर ऑपरेशन करने से कर दिया मना : परस राम
अस्पताल में हरनी के ऑपरेशन के लिए दो दिनों से भर्ती परस राम निवासी साच ने बताया कि उन्हें ऑपरेशन के लिए शुक्रवार की तारीख दी गई थी। ऑपरेशन करने के लिए विशेषज्ञ ने करीब 1900 रुपये की दवाई भी उनसे मंगवा ली। उन्हें दवाई का एक डोज भी दे दिया गया परंतु एन समय पर उन्हें यह कहा गया कि एनेस्थीसिया छुट्टी पर चला गया है। उनकी ऑपरेशन अगले शुक्रवार को होगा। उन्होंने कहा कि वह बिजली बोर्ड के कर्मचारी हैं। बीमारी के उपचार के लिए एक माह की छुट्टी ले रखी है। लेकिन अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर उन्हें लटकाया जा रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें अपना ऑपरेशन निजी अस्पताल में जाकर करवाना होगा।
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बाजार से खरीद चुके हैं ढाई हजार की दवाएं : सुरेंद्र
सुरेंद्र निवासी मुगला ने बताया कि वह दो दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने अपना स्मार्ट कार्ड भी अस्पताल में जमा करवा दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें मुफ्त दवाइयां नहीं मिल पाई हैं। अभी तक वह ढाई हजार रुपये की दवाएं बाजार से खरीद चुके हैं।
दवाएं खरीदने के लिए खर्च हो रहे पैसे : भागी राम
भागी राम निवासी डियुर ने बताया कि स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद वह बाजार से पैसे देकर दवाइयां खरीद रहे हैं। जबकि, सरकार स्मार्ट कार्ड पर मुफ्त दवाएं देने के नाम पर बड़े-बड़े वायदे कर रही है। एक हजार रुपये वह दवाइयों पर खर्च कर चुके हैं।
स्मार्ट कार्ड का नहीं मिल रहा लाभ : गुलाम नवी
गुलाम नवी ने बताया कि स्मार्ट कार्ड का अभी तक उन्हें कोई फायदा नहीं मिला है। स्टाफ नर्सें मरीज को स्मार्ट कार्ड के बारे में बताती तक नहीं हैं। डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं। तीमारदार को वे दवाएं बाजार से खरीद कर लानी पड़ती हैं। पांच सौ रुपये की दवा खरीद चुके हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत: पवन नैयर
सदर विधायक ने मरीजों की व्यथा सुनने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए कि जो चिकित्सक जेनरिक और सस्ती दवाइयां नहीं लिखते हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कहा कि इसके बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।
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अपने पैैसे से खरीदना पड़ा 35 हजार का शिकंजा: लेखराज
लेख राज निवासी बरौर ने बताया कि ढांक में गिरने से उनकी टांग टूट गई है। इसे जोड़ने के लिए डॉक्टर ने उन्हें शिकंजा लाने को कहा। इसकी कीमत 35 हजार रुपये है। स्मार्ट कार्ड होते हुए भी उन्हें शिकंजा अपने पैसे से खरीदना पड़ा। इसके अलावा दवाइयों पर अलग से खर्च हुआ। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड सिर्फ एक धोखा है। मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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ऐन मौके पर ऑपरेशन करने से कर दिया मना : परस राम
अस्पताल में हरनी के ऑपरेशन के लिए दो दिनों से भर्ती परस राम निवासी साच ने बताया कि उन्हें ऑपरेशन के लिए शुक्रवार की तारीख दी गई थी। ऑपरेशन करने के लिए विशेषज्ञ ने करीब 1900 रुपये की दवाई भी उनसे मंगवा ली। उन्हें दवाई का एक डोज भी दे दिया गया परंतु एन समय पर उन्हें यह कहा गया कि एनेस्थीसिया छुट्टी पर चला गया है। उनकी ऑपरेशन अगले शुक्रवार को होगा। उन्होंने कहा कि वह बिजली बोर्ड के कर्मचारी हैं। बीमारी के उपचार के लिए एक माह की छुट्टी ले रखी है। लेकिन अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर उन्हें लटकाया जा रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें अपना ऑपरेशन निजी अस्पताल में जाकर करवाना होगा।
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बाजार से खरीद चुके हैं ढाई हजार की दवाएं : सुरेंद्र
सुरेंद्र निवासी मुगला ने बताया कि वह दो दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने अपना स्मार्ट कार्ड भी अस्पताल में जमा करवा दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें मुफ्त दवाइयां नहीं मिल पाई हैं। अभी तक वह ढाई हजार रुपये की दवाएं बाजार से खरीद चुके हैं।
दवाएं खरीदने के लिए खर्च हो रहे पैसे : भागी राम
भागी राम निवासी डियुर ने बताया कि स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद वह बाजार से पैसे देकर दवाइयां खरीद रहे हैं। जबकि, सरकार स्मार्ट कार्ड पर मुफ्त दवाएं देने के नाम पर बड़े-बड़े वायदे कर रही है। एक हजार रुपये वह दवाइयों पर खर्च कर चुके हैं।
स्मार्ट कार्ड का नहीं मिल रहा लाभ : गुलाम नवी
गुलाम नवी ने बताया कि स्मार्ट कार्ड का अभी तक उन्हें कोई फायदा नहीं मिला है। स्टाफ नर्सें मरीज को स्मार्ट कार्ड के बारे में बताती तक नहीं हैं। डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं। तीमारदार को वे दवाएं बाजार से खरीद कर लानी पड़ती हैं। पांच सौ रुपये की दवा खरीद चुके हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत: पवन नैयर
सदर विधायक ने मरीजों की व्यथा सुनने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए कि जो चिकित्सक जेनरिक और सस्ती दवाइयां नहीं लिखते हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कहा कि इसके बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।