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आजादी के बाद भी सड़क से नहीं जुड़ पाया भादरा गांव
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:04 AM IST
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भरमौर (चंबा)। भरमौर विस क्षेत्र की दूरदराज पंचायत बडग्रां का भादरा गांव आजादी के बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। गांव की 200 लोगों की आबादी को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। गांव में बीमार व्यक्ति को चारपाई या पीठ पर उठाकर सात किमी दूर बडग्रां स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ता है। चुनाव के दौरान गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की राजनीतिक पार्टियां घोषणाएं तो कर जाती हैं। लेकिन, चुनाव होने के बाद उन घोषणाओं को कोई भी पूरा नहीं करता। गांव में एक प्राथमिक पाठशाला है।
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पांचवीं की पढ़ाई करने के बाद बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए राउपा बड़ग्रां व वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा लेने के लिए रावमापा मांदा जाना पड़ता है। गांव से स्कूल को जाने वाला रास्ता जंगल के बीच से होकर गुजरता है। बच्चों को जंगल के रास्ते पैदल स्कूल जाना पड़ता है। अभिभावकों को बच्चों की चिंता सताती रहती है। लोगों दलीप कुमार, चमन, बुधिया राम, घाटो देवी, ब्रह्मी, प्रकाश व सुरेश कुमार ने बताया कि भादरा गांव राजनीति का शिकार हुआ है। 100 की आबादी वाले गांव को सड़क से जोड़ा जा रहा है। जबकि 200 की आबादी वाले गांव को सड़क सुविधा से वंचित रखा जा रहा है।
लोकसभा चुनाव का किया था बहिष्कार
गांव के लोगों ने लोकसभा चुनाव में अपने मत का उपयोग नहीं किया था। सड़क के अभाव में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया था। लोगों का आरोप था कि सरकार व प्रशासन को अवगत करवाने के बाद भी गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया। ऐसे में राजनीतिक दलों को वोट देने का कोई औचित्य नहीं रहता। लोग राजनीतिक नेताओं को इसलिए वोट डालते हैं ताकि सरकार में जाकर वे लोगों की समस्याओं का समाधान करें।
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न्यूरो सर्जन डॉक्टर जनकराज पखरेटिया ने भादरा गांव जाकर लोगों से उनकी समस्याएं जानीं। साथ ही लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का कारण भी पूछा। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव को सड़क से नहीं जोड़ने का हवाला दिया। लोगों ने बताया कि राजनीतिक दलों के प्रत्याशी वोट मांगने आते हैं, लेकिन उसके बाद उनकी सुध तक नहीं लेते। जनकराज पखरेटिया ने लोगों को आश्वासन दिया कि अगर भाजपा उन पर भरोसा जताती है तो उनकी मांगों को सरकार के समक्ष रखकर हल करने के प्रयास करेंगे।
एसडीएम बाल कृष्ण ने बताया कि उन्हें भरमौर में नियुक्त हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। उपरोक्त गांव के लोगों की राय ली जाएगी। उनकी मांग को सरकार व उच्चाधिकारी के ध्यान में लाया जाएगा।
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