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निजी स्कूलों में हर साल बढ़ जाती है दस फीसदी फीस
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। जिले के निजी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर हो रही लूट को रोकने में प्रदेश सरकार पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रही है। इसकी वजह यह है कि अभी तक सरकार ने निजी स्कूलों के फीस स्ट्रक्चर को लेकर कोई मानक ही नहीं बनाए हैं। नतीजा स्कूल हर वर्ष मनमाने तरीके से फीस के साथ-साथ अन्य शुल्क बढ़ा देते हैं। जिले की बात करें तो यहां के निजी स्कूलों में हर साल फीस में दस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो रही है। इससे अभिभावकों पर हर साल आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि मध्यम वर्गीय परिवार के लिए निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
निजी स्कूल इसमें बिल्डिंग फंड के रूप में स्कूल प्रबंधन हर साल पांच प्रतिशत शुल्क ले रहा है। सरकार की ओर से इस मामले में कोई नियंत्रण न होने के चलते निजी स्कूल प्रबंधक मनमाने तरीके से प्रवेश शुल्क अभिभावकों से वसूल रहे हैं। जिले में 90 के करीब निजी स्कूल होंगे। यहां पर नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक के एक छात्र की फीस 800 से लेकर 2000 हजार रुपये तक हैं। जानकारी के अनुसार कुछ स्कूल जहां प्रवेश शुल्क के रूप में करीब 4800 रुपये ले रहे हैं तो वहीं दूसरी और कुछ स्कूल पांच हजार से 5500 रुपये तक प्रवेश स्कूल वसूल रहे हैं।
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अधिकतर स्कूलों में ऐसा चल रहा है। दबी आवाज में अभिभावक कुछ हद तक रोष तो प्रकट करते हैं। मगर सरकारी स्कूलों के हालात देखकर अभिभावक निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। इसके अलावा अन्य शुल्कों में भी निरंतर बढ़ोतरी होती रहती है। अभिभावकों की मानें तो हर साल फीस बढ़ोतरी की जा रही है। इसके चलते अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
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विभिन्न कार्यक्रमों का अलग से होता है खर्च
अभिभावकों का कहना है कि अधिकतर स्कूलों में जब भी कोई कार्यक्रम होता है तो उसके लिए अलग से खर्च उन्हें देना पड़ता है। सरकार की ओर से निजी स्कूलों पर फीस को लेकर अब तक कोई मापदंड तय नहीं किए गए हैं। इसके चलते निजी स्कूल प्रबंधक मनमर्जी पर उतारू है।
जिला उपशिक्षा अधिकारी सूरम सिंह ने बताया कि सरकार ने आरटीई एक्ट में फीस शामिल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला सरकार के विचाराधीन है। जल्द ही सरकार इस मामले को लेकर सकारात्मक पहल करेगी।