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शंकर पहुंचे कैलाश, बम-बम भोले के जयकारों से गूंजा भरमौर
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भरमौर (चंबा)। भरमौर चौरासी परिसर में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में शीश नवाया और पूजा अर्चना की। इस दौरान भरमौर नगरी भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठी। माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर अपने धाम कैलाश पहुंच जाते है। इस दिन कुछ पल चौरासी परिसर में महादेव ठहरे। चौरासी परिसर में शिवलिंगों को इस पावन पर फूलो से सजाया गया।
पवित्र मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद भगवान शिव कैलाश को छोड़ कर पाताल लोक अपने भक्तों को मिलने जाते हैं और महाशिरात्रि के दिन कैलाश धाम लौट आते हैं। सुबह से चौरासी परिसर के मणिमहेश मंदिर और धर्मराज मंदिर के भीतर मौजूद लिंगों का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है। गंगा, जल, दूध, शहद, घी, बिल्व पत्र और पुष्प से स्नान आदि करवाने के बाद पांच मेवे का भोग लगाया जाता है। सोमवार रात को चौरासी परिसर मे मौजूद मणिमहेश लिंग और धर्मराज लिंग में चार पहर की पूजा अर्चना की गई।
साल मे यह अवसर महाशिरात्रि के दिन आता है। यह पूजा रात दस बजे, बारह बजे, दो बजे फिर चार बजे होगी। उसके बाद जो रोजाना सुबह शाम पूजा होती है, वह वैसे ही होगी। इस दौरान श्रद्धालु आयोजित जागरण में भी हाजिरी भरते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर अपने कैलाश धाम जाने से पहले कुछ पल चौरासी मे रुकते है। धर्मराज मंदिर के पुजारी पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा बताते है कि महाशिरात्रि के दिन चौरासी मंदिरों का विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है और शाम को चार पहर की पूजा होती है। अगर कोई भक्त महाशिवरात्रि की शाम को जागरण करें और व्रत रखे तो जन्म के पुण्य अर्जित कर लेते है। मंणिमहेश मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा बताते है कि महाशिवरात्रि के शाम को चौरासी परिसर पर सारी रात जागरण किया जाता है। मंगलवार को चौरासी परिसर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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पवित्र मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद भगवान शिव कैलाश को छोड़ कर पाताल लोक अपने भक्तों को मिलने जाते हैं और महाशिरात्रि के दिन कैलाश धाम लौट आते हैं। सुबह से चौरासी परिसर के मणिमहेश मंदिर और धर्मराज मंदिर के भीतर मौजूद लिंगों का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है। गंगा, जल, दूध, शहद, घी, बिल्व पत्र और पुष्प से स्नान आदि करवाने के बाद पांच मेवे का भोग लगाया जाता है। सोमवार रात को चौरासी परिसर मे मौजूद मणिमहेश लिंग और धर्मराज लिंग में चार पहर की पूजा अर्चना की गई।
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साल मे यह अवसर महाशिरात्रि के दिन आता है। यह पूजा रात दस बजे, बारह बजे, दो बजे फिर चार बजे होगी। उसके बाद जो रोजाना सुबह शाम पूजा होती है, वह वैसे ही होगी। इस दौरान श्रद्धालु आयोजित जागरण में भी हाजिरी भरते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर अपने कैलाश धाम जाने से पहले कुछ पल चौरासी मे रुकते है। धर्मराज मंदिर के पुजारी पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा बताते है कि महाशिरात्रि के दिन चौरासी मंदिरों का विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है और शाम को चार पहर की पूजा होती है। अगर कोई भक्त महाशिवरात्रि की शाम को जागरण करें और व्रत रखे तो जन्म के पुण्य अर्जित कर लेते है। मंणिमहेश मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा बताते है कि महाशिवरात्रि के शाम को चौरासी परिसर पर सारी रात जागरण किया जाता है। मंगलवार को चौरासी परिसर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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