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Bilaspur News: झंडूता, घुमारवीं और समोह में नहीं हो रहा खैर कटान

Sun, 05 Nov 2023 06:23 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Nov 2023 06:23 PM IST
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Well harvesting is not happening in Jhanduta, Ghumarwin and Samoha.
- हजारों किसानों को करना पड़ रहा आर्थिक परेशानी का सामना
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- हर 10 साल बाद किया कटान का कार्य

संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। जिले के वन खंड झंडूता, घुमारवीं और समोह में दस साल की समय अवधि पूरी होने के बावजूद निजी भूमि पर वन विभाग की ओर से खैर कटान नहीं किया गया है। ऐसे में हजारों किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान अपनी निजी भूमि पर खैर के पेड़ लगा कर कई साल उनकी देखरेख करते हैं, ताकि उन्हें बेच कर आर्थिकी मजबूत की जा सके। खैर के पेड़ों का किसानों को लाखों रुपये मिलते हैं। इससे कई किसान अपने घरों के निर्माण, बच्चों के विवाह सहित बैंकों के कर्ज तक चुकाने की आस लगाए रहते हैं। पिछले साल झंडूता, घुमारवीं और समोह वन खंडों में हजारों किसानों की भूमि से खैर कटान किया जाना था, लेकिन विधानसभा चुनावों की आचार संहिता, फिर फायर सीजन, उसके बाद बरसात में आपदा आने के कारण अभी तक निजी भूमि में निशानदेही नहीं हुई है। बता दें कि सरकार के नियमों के अनुसार किसान अपनी निजी भूमि से दस साल तक खैर के पेड़ों को नहीं बेच सकता है। ऐसे में किसान दस साल तक खैर के पेड़ों की अच्छी तरह से देखभाल करता है। दस साल बाद वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम किसानों की निजी भूमि की निशानदेही सुनिश्चित करके कटान के लिए खैर के पेड़ चिन्हित करती है। ऐसे में हजारों किसान यह आस लगाए बैठे हैं कि निजी भूमि से खैर बेचने की अनुमति मिले तो बैंकों का कर्जा, बच्चों की पढ़ाई और ट्रेनिंग का खर्च, बच्चों के विवाह सहित घर बनाने में आर्थिक तंगी दूर हो सके। इन क्षेत्रों में कई किसानों ने फसल करना छोड़ दिया है, इसके बदले किसानों का ज्यादा रुख खैर की खेती करने में बढ़ने लगा है, क्योंकि किसानों की फसलों को जंगली जानवर और बेसहारा पशु बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे में किसान खैर की खेती में रुचि रख रहे हैं। एक साल से किसान खैर के पेड़ों को बेचने की आस पर बैठे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अधिकतर किसानों की निजी भूमि जंगलों के साथ है। वहीं इस साल यह कार्य नहीं होता है तो किसानों को और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। क्षेत्र के किसान जोगेंद्र सिंह, प्रेम लाल, मनोज कुमार, सुभाष चंद, चमन लाल, मोनिंदर सिंह, देवराज, रणजीत सिंह, गुलाबा राम, राकेश कुमार, प्यार सिंह, मुकेश कुमार सहित अन्य दर्जनों किसानों ने सरकार और प्रशासन से खैर कटान को जल्द मंजूरी देने की मांग की है।
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कोट्
वन परिक्षेत्र अधिकारी झंडूता देशराज ने बताया कि वन विभाग के आलाधिकारियों की ओर निजी भूमि से खैर कटान के लिए दिशा निर्देश मिलेंगे तो राजस्व विभाग से किसानों की निजी भूमि की निशानदेही करवाकर खैर के पेड़ों को चिन्हित करने का कार्य किया जाएगा।
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कोट्
तहसीलदार झंडूता अर्शिया शर्मा ने बताया कि वन विभाग निजी भूमि की निशानदेही करवाने की मांग करता है तो राजस्व विभाग की ओर से वन विभाग के साथ मिलकर इस कार्य को किया जाएगा।
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