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Bilaspur News: कृषि विज्ञान केंद्र में 52 किसानों को दिया खरपतवार का प्रशिक्षण
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- ग्लाइफोसेट खरपतवार के दुष्प्रभावों से किसानों को कराया अवगत
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में किसानों को ग्लाइफोसेट नामक खरपतवार नाशक के प्रयोग का प्रशिक्षण दिया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में दो दिनों तक ऑनलाइन और तीसरे दिन विज्ञान केंद्र में किसानों को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. गौरव ने बताया कि ग्लाइफोसेट के लगातार बढ़ते उपयोग के कारण बहुत से दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। इसके चलते नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट हेल्थ मैनेजमेंट हैदराबाद के निर्देशानुसार इसके सही इस्तेमाल के लिए पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर को यह प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण को हाइब्रिड मोड में चलाया गया, जिसमें ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रशिक्षु किसानों को केंद्र में बुलाकर उन्हें प्रैक्टिकल करवाकर इसके बारे में बताया गया। उन्होंने बताया कि खरपतवार के समय किसानों को अपना चेहरा मजबूती से ढकना चाहिए, ताकि एरोसोल उनकी नाक, आंख और मुंह में न जा सके। किसानों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए, ताकि एरोसोल उनकी त्वचा के संपर्क में न आ सके। छिड़काव उस समय किया जाना चाहिए जब हवा का वेग कम हो, क्योंकि तेज वेग वाली हवा हानिकारक एरोसोल फैला सकती है। इस प्रशिक्षण में 52 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। इस मौके पर केंद्र के प्रभारी सीमा शाह और डॉ. मनप्रीत कौर उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में किसानों को ग्लाइफोसेट नामक खरपतवार नाशक के प्रयोग का प्रशिक्षण दिया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में दो दिनों तक ऑनलाइन और तीसरे दिन विज्ञान केंद्र में किसानों को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. गौरव ने बताया कि ग्लाइफोसेट के लगातार बढ़ते उपयोग के कारण बहुत से दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। इसके चलते नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट हेल्थ मैनेजमेंट हैदराबाद के निर्देशानुसार इसके सही इस्तेमाल के लिए पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर को यह प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण को हाइब्रिड मोड में चलाया गया, जिसमें ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। सभी प्रशिक्षु किसानों को केंद्र में बुलाकर उन्हें प्रैक्टिकल करवाकर इसके बारे में बताया गया। उन्होंने बताया कि खरपतवार के समय किसानों को अपना चेहरा मजबूती से ढकना चाहिए, ताकि एरोसोल उनकी नाक, आंख और मुंह में न जा सके। किसानों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए, ताकि एरोसोल उनकी त्वचा के संपर्क में न आ सके। छिड़काव उस समय किया जाना चाहिए जब हवा का वेग कम हो, क्योंकि तेज वेग वाली हवा हानिकारक एरोसोल फैला सकती है। इस प्रशिक्षण में 52 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। इस मौके पर केंद्र के प्रभारी सीमा शाह और डॉ. मनप्रीत कौर उपस्थित रहे।
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