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Bilaspur News: वेस्ट टू बेस्ट अभियान से बेकार पेड़ को बना दिया कीमती
Thu, 30 Oct 2025 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 30 Oct 2025 11:46 PM IST
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डंगार स्कूल में पेड़ से तैयार किए गए बेंच टेबल। संवाद
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डंगार का अनोखा प्रयास बना मिसाल
बेकार पड़े सफेदे के पेड़ से बनीं बेंच, कुर्सियां और कलाकृतियां
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़(बिलासपुर)। इरादा नेक हो और लक्ष्य ऊंचा हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है, इस कहावत को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डंगार ने साकार कर दिखाया है। वर्षों से स्कूल के बाहर बेकार पड़े एक सूखे सफेदे के पेड़ को स्कूल प्रशासन, अध्यापकों और विद्यार्थियों ने मिलकर वेस्ट टू बेस्ट का अद्भुत उदाहरण बना दिया।
करीब छह वर्ष पहले तेज तूफान में स्कूल की सीमा पर खड़ा एक विशाल सफेदे का पेड़ गिरकर नाले में जा फंसा था। उसे हटाना, उठाना और उपयोग में लाना असंभव-सा लग रहा था। कुछ लोगों ने उसे दो-तीन हजार रुपये में बेचने का सुझाव भी दिया, लेकिन स्कूल प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को बेचने के बजाय उससे कुछ रचनात्मक करने का निर्णय लिया। प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों, एसएमसी और विद्यार्थियों ने मिलकर उस गिरे हुए पेड़ को जेसीबी की मदद से स्कूल प्रांगण में पहुंचाया। चरानियों की मदद से पेड़ को काटने-छांटने के बजाय प्राकृतिक रूप में ही प्रयोग किया गया। लकड़ी के डेढ़ से दो फुट लंबे टुकड़े कर उनसे बेंच और कुर्सीनुमा सीटें तैयार की गईं। विद्यार्थियों ने इन लकड़ी के टुकड़ों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग्स बनाईं और प्रेरक सूत्र लिखे। पेड़ की विशाल जड़ को भी जेसीबी की मदद से निकालकर मुख्य द्वार के पास कलात्मक रूप दिया गया। उसे साफ-सुथरा कर वार्निश और लोकल सजावट से आकर्षक बना दिया गया। आज यह जड़ स्कूल का प्रतीक बन चुकी है और आने-जाने वालों के आकर्षण का केंद्र है।
इस रचनात्मक प्रयोग से स्कूल को बिना कोई खर्च किए करीब एक से दो लाख रुपये तक के उपयोगी संसाधन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थियों के लिए अब ये बेंच और कलाकृतियां स्थायी संपत्ति बन गई हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सोच सकारात्मक हो और इरादा नेक, तो किसी भी बेकार वस्तु को मूल्यवान बनाया जा सकता है। बिना सरकारी धन खर्च किए बच्चों के लिए उपयोगी संसाधन तैयार करना संभव है।
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बेकार पड़े सफेदे के पेड़ से बनीं बेंच, कुर्सियां और कलाकृतियां
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़(बिलासपुर)। इरादा नेक हो और लक्ष्य ऊंचा हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है, इस कहावत को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डंगार ने साकार कर दिखाया है। वर्षों से स्कूल के बाहर बेकार पड़े एक सूखे सफेदे के पेड़ को स्कूल प्रशासन, अध्यापकों और विद्यार्थियों ने मिलकर वेस्ट टू बेस्ट का अद्भुत उदाहरण बना दिया।
करीब छह वर्ष पहले तेज तूफान में स्कूल की सीमा पर खड़ा एक विशाल सफेदे का पेड़ गिरकर नाले में जा फंसा था। उसे हटाना, उठाना और उपयोग में लाना असंभव-सा लग रहा था। कुछ लोगों ने उसे दो-तीन हजार रुपये में बेचने का सुझाव भी दिया, लेकिन स्कूल प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को बेचने के बजाय उससे कुछ रचनात्मक करने का निर्णय लिया। प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों, एसएमसी और विद्यार्थियों ने मिलकर उस गिरे हुए पेड़ को जेसीबी की मदद से स्कूल प्रांगण में पहुंचाया। चरानियों की मदद से पेड़ को काटने-छांटने के बजाय प्राकृतिक रूप में ही प्रयोग किया गया। लकड़ी के डेढ़ से दो फुट लंबे टुकड़े कर उनसे बेंच और कुर्सीनुमा सीटें तैयार की गईं। विद्यार्थियों ने इन लकड़ी के टुकड़ों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग्स बनाईं और प्रेरक सूत्र लिखे। पेड़ की विशाल जड़ को भी जेसीबी की मदद से निकालकर मुख्य द्वार के पास कलात्मक रूप दिया गया। उसे साफ-सुथरा कर वार्निश और लोकल सजावट से आकर्षक बना दिया गया। आज यह जड़ स्कूल का प्रतीक बन चुकी है और आने-जाने वालों के आकर्षण का केंद्र है।
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इस रचनात्मक प्रयोग से स्कूल को बिना कोई खर्च किए करीब एक से दो लाख रुपये तक के उपयोगी संसाधन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थियों के लिए अब ये बेंच और कलाकृतियां स्थायी संपत्ति बन गई हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सोच सकारात्मक हो और इरादा नेक, तो किसी भी बेकार वस्तु को मूल्यवान बनाया जा सकता है। बिना सरकारी धन खर्च किए बच्चों के लिए उपयोगी संसाधन तैयार करना संभव है।
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