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Bilaspur News: कार में चिट्टा मिलने पर दो दोषियों को दो साल का कठोर कारावास

Wed, 30 Sep 2026 08:10 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 08:10 PM IST
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Two convicts sentenced to two years rigorous imprisonment for drug possession in car
5.724 ग्राम हेरोइन बरामदगी मामले में घुमारवीं की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
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दोनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना, राशि जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास
एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 में आपराधिक साजिश का आरोप साबित नहीं हुआ

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष अदालत घुमारवीं ने कार के डैशबोर्ड से 5.724 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद होने के मामले में दो लोगों को दोषी करार देते हुए दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। दोनों ने जुर्माने की राशि जमा कर दी है। अदालत ने दोनों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 के तहत आपराधिक साजिश के आरोप से बरी कर दिया।
मामला वर्ष 2024 में घुमारवीं थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार पांच जून 2024 को एएसआई आशु वर्मा पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। शाम करीब 6:55 बजे सनोटी खड्ड के पास भटोली की ओर से एक कार आती दिखाई दी। पुलिस ने कार को रोककर तलाशी ली। कार के डैशबोर्ड से पॉलीथिन का पैकेट मिला, जिसमें हल्के भूरे रंग का दानेदार-पाउडरनुमा पदार्थ था। मौके पर इसका वजन 5.95 ग्राम था। नमूना जांच के लिए राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा भेजा गया, जहां पदार्थ डायएसिटाइल मॉर्फिन (हेरोइन) पाया गया। अदालत ने बरामदगी की मात्रा 5.724 ग्राम मानी।
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अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल स्वतंत्र गवाह के पक्षद्रोही होने से अभियोजन का मामला समाप्त नहीं होता। गवाह ने जब्ती मेमो और नमूना सील पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार किए और तस्वीरों में अपनी मौजूदगी भी पहचानी। अदालत ने पुलिस गवाहों की गवाही को भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विश्वसनीय माना।
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अदालत ने माना कि दोनों आरोपी एक ही वाहन में सवार थे और चिट्टा डैशबोर्ड से बरामद हुआ। किसी ने यह दावा नहीं किया कि वह लिफ्ट लेकर वाहन में बैठा था। इसलिए अदालत ने दोनों की चिट्टे पर सचेत और संयुक्त कब्जेदारी मानी। बरामदगी व्यक्तिगत तलाशी से नहीं होने के कारण एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 को भी लागू नहीं माना गया।

अदालत ने धारा 21(बी) के तहत अपराध साबित माना, जबकि धारा 29 के तहत आपराधिक साजिश का पर्याप्त आधार नहीं मिला। दोनों को दो-दो साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। हिरासत में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के आदेश भी दिए गए हैं।
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