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Bilaspur News: सीएम हेल्पलाइन पर झूठी व बेबुनियाद शिकायत करने के मामले में दो आरोपी बरी

Fri, 05 Dec 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 11:55 PM IST
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Two accused acquitted in the case of making false and baseless complaint on CM Helpline
अदालत से
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला
कहा, सिद्ध नहीं हुआ आरोपियों पर झूठी शिकायत देने का अपराध
झंडूता की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने ठहराया था दोषी


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झूठी शिकायत प्रकरण में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से 31 मई 2024 को सुनाई गई सजा और 15 जून 2024 के आदेश को पूरी तरह रद्द करते हुए कहा कि आरोपियों पर झूठी शिकायत देने का अपराध सिद्ध नहीं होता।
इससे पहले झंडूता की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 1,000 रुपये जुर्माना और डिफॉल्ट की स्थिति में छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी।
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गांव घराण निवासी दोनों व्यक्तियों का गांव की महिला के साथ जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप था कि आरोपी बार-बार पुलिस थाना तलाई, 112 हेल्पलाइन और सीएम हेल्पलाइन पर झूठी व बेबुनियाद शिकायत कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, वे भूमि विवाद को लेकर पुलिस पर गलत तरीके से सही जांच न करने के आरोप लगाते थे और बार-बार शिकायत देकर पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालते हैं, इसी आधार पर उन पर झूठी सूचना देकर सरकारी कर्मचारी को गुमराह करने के तहत कलंदरा बनाया गया था।
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आरोपियों की गई शिकायतों को झूठा साबित करने के लिए कोई ठोस रिकॉर्ड, मूल दस्तावेज या जांच निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि पुलिस व गवाहों की ओर से प्रस्तुत अधिकांश दस्तावेज फोटो कॉपी थे, जिनकी कोई विधिक वैधता नहीं है। कोई भी अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह साबित होता कि शिकायतें वास्तव में झूठी थीं। गवाह भी अपने बयानों में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। पक्षों में सिविल मुकदमा लंबित है और हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं, इसलिए आरोपियों का अपने अधिकार को लेकर शिकायत करना झूठी शिकायत की श्रेणी में नहीं आता।

अदालत ने टिप्पणी की कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा, और निचली अदालत का निर्णय विधि के अनुरूप नहीं था। अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। यदि उन्होंने कोई जुर्माना जमा कराया है तो उसे अपील/रिवीजन की अवधि पूरी होने के बाद वापस किया जाएगा।
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