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बिलासपुर में सालिगराम आए तुलसी को ब्याह ले गए
राजकुमार सेन / अमर उजाला, बिलासपुर।
Updated Tue, 24 Nov 2015 10:52 PM IST
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यहां आज भी युग बीती परंपरा का बखूबी निर्वाह हो रहा है। धर्म शास्त्रों से जुड़े लोग त्रेतायुग में राक्षस राज जालंधर की पत्नी वृंदा को भगवान विष्णु द्वारा दिए वचन का पालन कर रहे हैं। त्रेतायुग में वृंदा बनी मां तुलसी का विवाह हिंदु रीति रिवाजों से भगवान सालिगराम से किया जाता है।
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बिलासपुर के कई गांवों में सोमवार को सदियों पुरानी इस परंपरा का बखूबी निर्वहन किया गया। तुलसी के विवाह का महत्व कन्या दान के समतुल्य माना जाता है। भगवान श्री सत्यनारायण मंदिर (ठाकुरद्वारा) से बैंड बाजों से भगवान सालिगराम की बारात निकलती है। यजमान के घर पहुंचकर लग्न वेद किए जाते हैं।
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बारातियों की आवभगत यजमान पक्ष करता है। मेहमानों को तुलसी विवाह का निमंत्रण भेजा जाता है। विद्वान पंडित मंत्रोच्चारण से भगवान सालिगराम और माता तुलसी का विवाह संपन्न करवाते हैं। बताते हैं कि जिन लोगों के घर में कन्या नहीं होती है। अधिकांश वह लोग तुलसी को बेटी मानकर उसका कन्यादान करते हैं।
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इससे उन्हें कन्यादान के समतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान सालिगराम और माता तुलसी के विवाह के लिए साल में विशेष दिन निर्धारित होता है। जो साल में एक बार ही आता है। धार्मिक कथाओं में इस दिन श्री हरि विष्णु निंद्रा से भी जागते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु और वृंदा की कथा
बिलासपुर श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर के पंडित बाबू राम ने बताया कि धर्म शास्त्रों में भगवान सालिगराम और मां तुलसी का प्रसंग त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। त्रेतायुग में राक्षस राज जालंधर के आतंक से सभी देवता और लोग भयभीत थे। भगवान शिव से जालंधर वर लेकर शक्तिशाली हो गया था। जालंधर की पतिव्रता पत्नी वृंदा की भक्ति का पुण्य भी उसके पति को मिल रहा था। इससे युद्ध में जालंधर भगवान शिव से पराजित नहीं हो रहा था। सभी देवता भगवान श्री हरि की शरण में गए। उन्होंने युक्ति से जालंधर के वेश में वृंदा के दर पहुंचकर उनके पति तत्व को कमजोर किया। इससे युद्ध में जालंधर मारा गया। भगवान विष्णु ने वृंदा को अपना नारायण स्वरूप दिखाया। वृंदा के वचन में बंधे भगवान विष्णु तब से लेकर आज तक हर साल वृंदा रूपी तुलसी से शादी के बंधन में बंधते हैं।
हर्षोल्लास से किया तुलसी का विवाह
जिला के भगेड में लोगों ने तुलसी मैय्या का विवाह हर्षोल्लास से किया। मंत्रोच्चारण सहित भगवान शालीग्राम और तुलसी मैय्या का विवाह संपन्न किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने शादी में भाग लिया। लोगों ने भगवान श्री हरि विष्णु और मां तुलसी से आशीर्वाद लिया। भगवान विष्णु और तुलसी की शादी को संपन्न करवाने के लिए मंडी जिला आचार्य चुड़ामणी पहुंचे थे।
उधर, औहर पंचायत के गांव राहियां से पंडित केशव भगवान विष्णु की बारात लेेकर भगेड़ में पंडित वेेद प्रकाश के घर पहुंचे। शादी में औहर और भगेड़ में बिलासपुरी धाम का आयोजन किया गया।