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Bilaspur News: कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर चार साल बाद भी सफर सुरक्षित नहीं
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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एकतरफा यातायात। संवाद
हर बरसात में दरक रहे पहाड़,भूस्खलन से बार-बार थम रहा यातायात
वन-वे व्यवस्था और जाम से परेशान वाहन चालक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/ऋषिकेश। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यातायात शुरू हुए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन यह हाईवे आज भी वाहन चालकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं बन पाया है। हर मानसून में कई स्थानों पर पहाड़ियां दरकने से भूस्खलन होता है और हाईवे पर यातायात प्रभावित हो जाता है। कई जगह वाहनों को वन-वे व्यवस्था के तहत निकाला जाता है, जिससे यात्रियों को घंटों जाम और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि पहाड़ों की अवैज्ञानिक कटिंग और निर्माण के दौरान की गई अवैध डंपिंग आज भी इस हाईवे पर खतरे की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है। अगस्त 2023 में इस फोरलेन को ट्रायल के आधार पर शुरू किया गया था और बाद में इसे नियमित यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद से हर बरसात में मैहला, समलेटू, थापना, दड़याना, धराड़सानी, पनोह और बलोह टोल प्लाजा के आसपास बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है। मंडी-भराड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण करीब आठ मकान भी खतरे की जद में आ गए थे, लेकिन उनके बचाव के लिए एनएचएआई वहां पर डंगा लगाने का काम कर रहा है। मैहला, थापना और समलेटू में हर मानसून के दौरान कई बार यातायात को वन-वे करना पड़ता है। अब तक भूस्खलन की घटनाओं में एक व्यक्ति की जान भी जा चुकी है। लोगों का कहना है कि मौजा मैहला के डडनाल जंगल क्षेत्र में मूल अलाइनमेंट बदलकर पहाड़ों की लगभग 90 डिग्री तक कटिंग की गई, जिसके कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील बन गया है। हर बरसात में यहां जानलेवा हालात पैदा हो जाते हैं और वाहन चालक पिछले चार साल से वन-वे व्यवस्था, बार-बार लगने वाले जाम की परेशानी झेल रहे हैं। हर साल लगातार हो रहे भूस्खलन को देखते हुए एनएचएआई ने मैहला और थापना क्षेत्र में पहाड़ियों की स्लोप कटिंग का कार्य शुरू किया है, ताकि ढीली चट्टानों को हटाकर हाईवे पर सफर को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान किए जा रहे ये कार्य इस बरसात में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उनका मानना है कि जब तक वैज्ञानिक तरीके से ढलानों का स्थायी समाधान, मजबूत रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं की जाती, तब तक हर बरसात में भूस्खलन और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहेगा। फोरलेन निर्माण के दौरान निकाले गए मलबे को कई स्थानों पर कलवर्ट, पुलियों और पुलों के आसपास ही डंप कर दिया गया। पुलों के नीचे और दोनों ओर आज भी मलबे के ढेर पड़े हैं। हाईवे किनारे बनी जल निकासी नालियां कई स्थानों पर मलबे से भर चुकी हैं, जबकि कुछ जगहों पर नालियां बनाई ही नहीं गईं। इसके चलते बरसात का पानी खेतों और घासणियों में घुसकर लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल और ब्रेस्ट वॉल के अभाव में पहाड़ियां लगातार दरक रही हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियां टोल टैक्स और अन्य शुल्क तो पूरी तरह वसूल रही हैं, लेकिन कई स्थानों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक गति से वाहन चलाना संभव नहीं है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब लोकल सड़कों पर भी लगभग यही गति रहती है तो फिर फोरलेन का उद्देश्य क्या रह जाता है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने 77 किलोमीटर लंबे किरतपुर-नेरचौक फोरलेन को प्रदेश के विकास की बड़ी परियोजना माना गया था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर तैयार यह सड़क अब कई स्थानों पर विनाश का कारण बनती जा रही है। भूस्खलन से केवल आम लोगों को ही नुकसान नहीं उठाना पड़ता, बल्कि हर साल मलबा हटाने, यातायात बहाल करने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पर एनएचएआई को भी करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा भुगत रहे लोग
हिमाचल प्रदेश को विकास की दौड़ में शामिल करने के लिए कीरतपुर-मनाली हाईवे तो मिला, लेकिन निर्माण के लिए प्रकृति से हुई छेड़छाड़ की कीमत लोगों को अपना सब कुछ गंवाकर चुकानी पड़ रही है। पहली ही बरसात में हुई तबाही इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, फिर भी लोगों से टोल टैक्स वसूला जा रहा है। हाईवे पर 60 किलोमीटर से ऊपर स्पीड नहीं है। नीतू सिंह, यात्री
खनन ने पहाड़ों को कर दिया खोखला
फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ों की 90 डिग्री पर कटिंग, भारी ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग और अंधाधुंध खनन ने पहाड़ों को खोखला कर दिया। लाखों टन मलबा बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के नदी-नालों तथा झील किनारे डंप किया गया। इसका परिणाम यह है कि हर बरसात में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर तबाही का मंजर देखने को मिलता है।
मदन लाल शर्मा, महासचिव, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति
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वन-वे व्यवस्था और जाम से परेशान वाहन चालक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/ऋषिकेश। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यातायात शुरू हुए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन यह हाईवे आज भी वाहन चालकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं बन पाया है। हर मानसून में कई स्थानों पर पहाड़ियां दरकने से भूस्खलन होता है और हाईवे पर यातायात प्रभावित हो जाता है। कई जगह वाहनों को वन-वे व्यवस्था के तहत निकाला जाता है, जिससे यात्रियों को घंटों जाम और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि पहाड़ों की अवैज्ञानिक कटिंग और निर्माण के दौरान की गई अवैध डंपिंग आज भी इस हाईवे पर खतरे की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है। अगस्त 2023 में इस फोरलेन को ट्रायल के आधार पर शुरू किया गया था और बाद में इसे नियमित यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद से हर बरसात में मैहला, समलेटू, थापना, दड़याना, धराड़सानी, पनोह और बलोह टोल प्लाजा के आसपास बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है। मंडी-भराड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण करीब आठ मकान भी खतरे की जद में आ गए थे, लेकिन उनके बचाव के लिए एनएचएआई वहां पर डंगा लगाने का काम कर रहा है। मैहला, थापना और समलेटू में हर मानसून के दौरान कई बार यातायात को वन-वे करना पड़ता है। अब तक भूस्खलन की घटनाओं में एक व्यक्ति की जान भी जा चुकी है। लोगों का कहना है कि मौजा मैहला के डडनाल जंगल क्षेत्र में मूल अलाइनमेंट बदलकर पहाड़ों की लगभग 90 डिग्री तक कटिंग की गई, जिसके कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील बन गया है। हर बरसात में यहां जानलेवा हालात पैदा हो जाते हैं और वाहन चालक पिछले चार साल से वन-वे व्यवस्था, बार-बार लगने वाले जाम की परेशानी झेल रहे हैं। हर साल लगातार हो रहे भूस्खलन को देखते हुए एनएचएआई ने मैहला और थापना क्षेत्र में पहाड़ियों की स्लोप कटिंग का कार्य शुरू किया है, ताकि ढीली चट्टानों को हटाकर हाईवे पर सफर को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
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हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान किए जा रहे ये कार्य इस बरसात में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उनका मानना है कि जब तक वैज्ञानिक तरीके से ढलानों का स्थायी समाधान, मजबूत रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं की जाती, तब तक हर बरसात में भूस्खलन और यातायात बाधित होने का खतरा बना रहेगा। फोरलेन निर्माण के दौरान निकाले गए मलबे को कई स्थानों पर कलवर्ट, पुलियों और पुलों के आसपास ही डंप कर दिया गया। पुलों के नीचे और दोनों ओर आज भी मलबे के ढेर पड़े हैं। हाईवे किनारे बनी जल निकासी नालियां कई स्थानों पर मलबे से भर चुकी हैं, जबकि कुछ जगहों पर नालियां बनाई ही नहीं गईं। इसके चलते बरसात का पानी खेतों और घासणियों में घुसकर लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल और ब्रेस्ट वॉल के अभाव में पहाड़ियां लगातार दरक रही हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियां टोल टैक्स और अन्य शुल्क तो पूरी तरह वसूल रही हैं, लेकिन कई स्थानों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक गति से वाहन चलाना संभव नहीं है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब लोकल सड़कों पर भी लगभग यही गति रहती है तो फिर फोरलेन का उद्देश्य क्या रह जाता है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने 77 किलोमीटर लंबे किरतपुर-नेरचौक फोरलेन को प्रदेश के विकास की बड़ी परियोजना माना गया था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर तैयार यह सड़क अब कई स्थानों पर विनाश का कारण बनती जा रही है। भूस्खलन से केवल आम लोगों को ही नुकसान नहीं उठाना पड़ता, बल्कि हर साल मलबा हटाने, यातायात बहाल करने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पर एनएचएआई को भी करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा भुगत रहे लोग
हिमाचल प्रदेश को विकास की दौड़ में शामिल करने के लिए कीरतपुर-मनाली हाईवे तो मिला, लेकिन निर्माण के लिए प्रकृति से हुई छेड़छाड़ की कीमत लोगों को अपना सब कुछ गंवाकर चुकानी पड़ रही है। पहली ही बरसात में हुई तबाही इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, फिर भी लोगों से टोल टैक्स वसूला जा रहा है। हाईवे पर 60 किलोमीटर से ऊपर स्पीड नहीं है। नीतू सिंह, यात्री
खनन ने पहाड़ों को कर दिया खोखला
फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ों की 90 डिग्री पर कटिंग, भारी ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग और अंधाधुंध खनन ने पहाड़ों को खोखला कर दिया। लाखों टन मलबा बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के नदी-नालों तथा झील किनारे डंप किया गया। इसका परिणाम यह है कि हर बरसात में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर तबाही का मंजर देखने को मिलता है।
मदन लाल शर्मा, महासचिव, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एकतरफा यातायात। संवाद

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एकतरफा यातायात। संवाद

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एकतरफा यातायात। संवाद

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर एकतरफा यातायात। संवाद