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Bilaspur News: कथा में सुनाया श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग

Wed, 22 Oct 2025 11:20 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 11:20 PM IST
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The story tells the story of the marriage of Shri Krishna and Rukmini.
डिग्गर गांव में कथा का वाचन करते हुए आचार्य भगत राम नड्डा। संवाद
पांच गीतों को भाव से गाने वाले व्यक्ति को मिलता है भवसागर पार करने का लाभ
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जब तक जीव में अहंकार और अभिमान है, भगवान उनसे रहते हैं दूर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बैरी रजादियां के डिग्गर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य भगत राम नड्डा ने भक्ति, ज्ञान और साधना के महत्व को बताते हुए श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि रुक्मिणी स्वयं लक्ष्मी का अवतार हैं और उनका विवाह भगवान श्रीकृष्ण से होना इस बात का प्रतीक है कि लक्ष्मी को हमेशा प्रभु के काम में लगाना चाहिए। यदि जीव अपनी लक्ष्मी को भगवान के कार्य में नहीं लगाता, तो वह धन, सुख या स्वास्थ्य के रूप में जीव से दूर चला जाता है। इस दिन महारास के पंच अध्याय का भी विशेष वर्णन किया गया। आचार्य ने समझाया कि इन पांच गीतों को भाव से गाने वाले व्यक्ति को भवसागर पार करने का लाभ मिलता है और उसे वृंदावन की भक्ति सहज ही प्राप्त होती है। कथा में यह भी बताया गया कि यह प्रसंग काम पर विजय का संदेश देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने दिखाया कि काम के मोह और वासना पर नियंत्रण ही सच्ची भक्ति है। आचार्य ने समझाया कि भगवान तक कामदेव को पराजित नहीं कर सके, और इसी से यह शिक्षा मिलती है कि निष्काम भाव से किए गए कर्म जीवन में विजय और मोक्ष का मार्ग बनाते हैं। विरह की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। गोपी गीत के माध्यम से यह समझाया गया कि जब तक जीव में अहंकार और अभिमान है, भगवान उनसे दूर रहते हैं। लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में तड़पता है, तो भगवान उस पर अनुग्रह दृष्टि डालते हैं और दर्शन देते हैं।
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इसके अलावा आचार्य ने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह के साथ-साथ अन्य विवाहों का भी उल्लेख किया और समझाया कि विवाह केवल सामाजिक रीति नहीं, बल्कि भगवान की मर्यादा और भक्ति का प्रतीक है। कथा समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक पंडित जीवानंद शैल ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भक्ति, धर्म और निष्काम कर्म की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि कथा के संदेशों को जीवन में अपनाना ही सच्चा पुण्य और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है।
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