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Bilaspur News: झालमू मंदिर में 350 साल पुरानी तपोस्थली की सुनाई कथा

Mon, 21 Sep 2026 12:11 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 12:11 AM IST
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The story of the 350-year-old *taposthali* (place of penance) at Jhalmu Temple was recounted.
बाबा जमना दास ने बनाया था झालमू को तपोस्थली, भागवत कथा का भंडारे के साथ समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कोलडैम क्षेत्र के कसोल स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर झालमू में रमण मुनि महाराज उदासीन अखाड़ा की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को भंडारे के साथ समापन हुआ। कथा वाचक बाबा रमन मुनि महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ मंदिर की प्राचीन मान्यताओं और बाबा जमना दास महाराज की तपोस्थली से जुड़े प्रसंग सुनाए।
बाबा रमन मुनि ने बताया कि करीब 350 वर्ष पहले बाबा जमना दास महाराज ने झालमू क्षेत्र को अपनी तपोस्थली बनाया था। मंदिर में स्थापित अष्टधातु की छोटी-छोटी ठाकुर जी की प्रतिमाओं को भी उनके समय का माना जाता है। उन्होंने बताया कि एक बार बाबा जमना दास एक भक्त की गाय को तांत्रिकों से छुड़ाकर झालमू ले आए थे। गाय उनके पीछे-पीछे मंदिर तक पहुंची।
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एक अन्य प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि झालमू जंगल में बाघ ने गाय को पकड़ लिया था। बाबा जमना दास ने दूर रहते हुए भी उसकी रक्षा की और उपचार के लिए लोगों को निर्देश दिए। बाबा रमन मुनि ने कहा कि ये प्रसंग बुजुर्गों से चली आ रही परंपरागत कथाओं का हिस्सा हैं। उन्होंने ठाकुर जी की सेवा को अपना सौभाग्य बताया। कथा के समापन पर आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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