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नई पेंशन योजना की अधिसूचना को 2006 से लागू करने पर प्रदेश को होगा 2500 करोड़ का फायदा : राणा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नई पेंशन योजना की अधिसूचना को 15 मई 2003 की जगह 17 अगस्त 2006 से लागू करने पर सरकार को 2500 करोड़ का फायदा हो सकता है। प्रदेश सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। यह बात प्रेस को जारी बयान में नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ के पूर्व राज्य मुख्य सलाहकार अश्वनी राणा ने कही।
उन्होंने बताया कि सरकार ने 15 मई 2003 को नई पेंशन योजना राज्य में लागू करने के लिए सीसीएस पेंशन नियम 1972 में संशोधन कर कंट्रीब्यूटरी पेंशन नियम बनाने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने कंट्रीब्यूटरी पेंशन नियम 17 अगस्त 2006 को बनाकर इसकी अधिसूचना 15 मई 2003 से लागू कर दी l इन तीन साल के बीच नियुक्त कर्मचारियों को न तो जीपीएफ नंबर मिला न ही एनपीएस का पीआरएएन नंबर मिला। इस दौरान के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। अश्वनी राणा ने बताया कि 17 अगस्त 2006 की अधिसूचना जो 15 मई 2003 से लागू हुई है वह गलत है। इसे 17 अगस्त 2006 से ही लागू होना चाहिए था। ऐसा करने से प्रदेश में नई पेंशन योजना के तहत सरकार और कर्मचारियों का पांच हजार करोड़ वापस आने का रास्ता साफ हो जाएगा। कहा कि इसके लिए वह उच्च न्यायालय भी गए हैं और वहां पर याचिका दायर की है।
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बिलासपुर। नई पेंशन योजना की अधिसूचना को 15 मई 2003 की जगह 17 अगस्त 2006 से लागू करने पर सरकार को 2500 करोड़ का फायदा हो सकता है। प्रदेश सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। यह बात प्रेस को जारी बयान में नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ के पूर्व राज्य मुख्य सलाहकार अश्वनी राणा ने कही।
उन्होंने बताया कि सरकार ने 15 मई 2003 को नई पेंशन योजना राज्य में लागू करने के लिए सीसीएस पेंशन नियम 1972 में संशोधन कर कंट्रीब्यूटरी पेंशन नियम बनाने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने कंट्रीब्यूटरी पेंशन नियम 17 अगस्त 2006 को बनाकर इसकी अधिसूचना 15 मई 2003 से लागू कर दी l इन तीन साल के बीच नियुक्त कर्मचारियों को न तो जीपीएफ नंबर मिला न ही एनपीएस का पीआरएएन नंबर मिला। इस दौरान के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। अश्वनी राणा ने बताया कि 17 अगस्त 2006 की अधिसूचना जो 15 मई 2003 से लागू हुई है वह गलत है। इसे 17 अगस्त 2006 से ही लागू होना चाहिए था। ऐसा करने से प्रदेश में नई पेंशन योजना के तहत सरकार और कर्मचारियों का पांच हजार करोड़ वापस आने का रास्ता साफ हो जाएगा। कहा कि इसके लिए वह उच्च न्यायालय भी गए हैं और वहां पर याचिका दायर की है।
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