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Bilaspur News: आस्था के पथ पर बदहाली का पहरा, मंदिर तक पहुंचने के लिए देते हैं कड़ी परीक्षा
Fri, 06 Feb 2026 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:38 PM IST
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ग्राम पंचायत साई के सोरा बिऊंस स्थित श्री नयना देवी जी के मंदिर को जाने वाली सड़क। संवाद
श्री नयना देवी जी के मूल स्थान सोरा बिऊंस की राह हुई दूभर
पक्की सड़क, सुरक्षित पैदल रास्ते को तरस रहा है प्राचीन मान्यताओं का स्थल
खतरे के साये में सफर, खोखली हो चुकी हैं मंदिर तक जाने वाली पौड़ियां
प्रशासनिक और सीमा विवाद है सड़क की समस्या का मुख्य कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर(बिलासपुर)। कहते हैं कि भक्ति की राह कठिन होती है, लेकिन ग्राम पंचायत साई खारसी के सोरा बिऊंस स्थित शक्तिपीठ माता श्री नयना देवी जी के मूल स्थान तक पहुंचने के लिए जिस राह से श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ रहा है वह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्राचीन मान्यताओं और अटूट श्रद्धा का केंद्र यह मंदिर आज भी एक पक्की सड़क और सुरक्षित पैदल रास्ते को तरस रहा है।
मंदिर कमेटी के सचिव बाबूराम शर्मा ने बताया कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यहां स्थापित माता की मूर्ति कोई कृत्रिम या निर्मित प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल में स्वयं प्रकट (स्वयंभू) हुई थी। इसी कारण क्षेत्र के लोग माता को अपनी इष्ट देवी, कुलदेवी और आराध्य देवी के रूप में पूजते हैं। मंदिर का नवनिर्माण श्रद्धालुओं के सहयोग से निरंतर जारी है, लेकिन बाहरी संपर्क मार्ग की स्थिति दयनीय बनी हुई है। मुख्य मार्ग लाड़ाघाट-सुंई सुरहाड़ सड़क से मंदिर तक का करीब आधा किलोमीटर का हिस्सा सालों से कच्चा, तंग और उबड़-खाबड़ है। बारिश के दिनों में यहां गाड़ियां ले जाना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। यहां बनी पौड़ियां बरसात और भूस्खलन के कारण नीचे से पूरी तरह खोखली हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
यह मंदिर केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यहां गरीब कन्याओं के विवाह और अन्य सामाजिक मांगलिक कार्य मंदिर कमेटी के सहयोग से होते हैं। हर रविवार और मंगलवार को यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। साथ ही, पिछले 40 वर्ष से लगातार मई महीने में यहां भव्य मेले और कुश्ती दंगल का आयोजन किया जा रहा है। खराब सड़क के कारण सामान ढोने और बुजुर्गों-बच्चों को पहुंचने में भारी असुविधा होती है। सड़क की समस्या के पीछे का प्रमुख कारण प्रशासनिक और सीमा विवाद है। सचिव बाबूराम शर्मा के अनुसार, मंदिर साईं खारसी पंचायत में आता है, लेकिन जिस स्थान से सड़क मुड़ती है, वहां सोलधा और दिगथली पंचायतों की भूमि लगती है। क्षेत्र के प्रबुद्ध श्रद्धालु जितेंद्र शर्मा ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सार्वजनिक समस्या है। जब तक तीनों पंचायतों के जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी एक साथ बैठकर आपसी सहमति से रास्ता नहीं निकालेंगे, तब तक लाखों श्रद्धालुओं की यह पीड़ा दूर नहीं होगी। जनप्रतिनिधियों को अपनी राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर इस धार्मिक स्थल के विकास के लिए प्रयास करने चाहिए। ग्रामीणों और मंदिर कमेटी ने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि इस लिंक रोड को जल्द पक्का किया जाए और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुई पौड़ियों की मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी अनहोनी को टाला जा सके और श्रद्धालुओं की राह सुगम हो सके।
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पक्की सड़क, सुरक्षित पैदल रास्ते को तरस रहा है प्राचीन मान्यताओं का स्थल
खतरे के साये में सफर, खोखली हो चुकी हैं मंदिर तक जाने वाली पौड़ियां
प्रशासनिक और सीमा विवाद है सड़क की समस्या का मुख्य कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर(बिलासपुर)। कहते हैं कि भक्ति की राह कठिन होती है, लेकिन ग्राम पंचायत साई खारसी के सोरा बिऊंस स्थित शक्तिपीठ माता श्री नयना देवी जी के मूल स्थान तक पहुंचने के लिए जिस राह से श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ रहा है वह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्राचीन मान्यताओं और अटूट श्रद्धा का केंद्र यह मंदिर आज भी एक पक्की सड़क और सुरक्षित पैदल रास्ते को तरस रहा है।
मंदिर कमेटी के सचिव बाबूराम शर्मा ने बताया कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। यहां स्थापित माता की मूर्ति कोई कृत्रिम या निर्मित प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल में स्वयं प्रकट (स्वयंभू) हुई थी। इसी कारण क्षेत्र के लोग माता को अपनी इष्ट देवी, कुलदेवी और आराध्य देवी के रूप में पूजते हैं। मंदिर का नवनिर्माण श्रद्धालुओं के सहयोग से निरंतर जारी है, लेकिन बाहरी संपर्क मार्ग की स्थिति दयनीय बनी हुई है। मुख्य मार्ग लाड़ाघाट-सुंई सुरहाड़ सड़क से मंदिर तक का करीब आधा किलोमीटर का हिस्सा सालों से कच्चा, तंग और उबड़-खाबड़ है। बारिश के दिनों में यहां गाड़ियां ले जाना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। यहां बनी पौड़ियां बरसात और भूस्खलन के कारण नीचे से पूरी तरह खोखली हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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यह मंदिर केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यहां गरीब कन्याओं के विवाह और अन्य सामाजिक मांगलिक कार्य मंदिर कमेटी के सहयोग से होते हैं। हर रविवार और मंगलवार को यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। साथ ही, पिछले 40 वर्ष से लगातार मई महीने में यहां भव्य मेले और कुश्ती दंगल का आयोजन किया जा रहा है। खराब सड़क के कारण सामान ढोने और बुजुर्गों-बच्चों को पहुंचने में भारी असुविधा होती है। सड़क की समस्या के पीछे का प्रमुख कारण प्रशासनिक और सीमा विवाद है। सचिव बाबूराम शर्मा के अनुसार, मंदिर साईं खारसी पंचायत में आता है, लेकिन जिस स्थान से सड़क मुड़ती है, वहां सोलधा और दिगथली पंचायतों की भूमि लगती है। क्षेत्र के प्रबुद्ध श्रद्धालु जितेंद्र शर्मा ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सार्वजनिक समस्या है। जब तक तीनों पंचायतों के जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी एक साथ बैठकर आपसी सहमति से रास्ता नहीं निकालेंगे, तब तक लाखों श्रद्धालुओं की यह पीड़ा दूर नहीं होगी। जनप्रतिनिधियों को अपनी राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर इस धार्मिक स्थल के विकास के लिए प्रयास करने चाहिए। ग्रामीणों और मंदिर कमेटी ने प्रशासन व सरकार से मांग की है कि इस लिंक रोड को जल्द पक्का किया जाए और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुई पौड़ियों की मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी अनहोनी को टाला जा सके और श्रद्धालुओं की राह सुगम हो सके।

ग्राम पंचायत साई के सोरा बिऊंस स्थित श्री नयना देवी जी के मंदिर को जाने वाली सड़क। संवाद
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