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Bilaspur News: श्रद्धालुओं को राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम प्रसंग सुनाया
Mon, 30 Mar 2026 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 30 Mar 2026 11:24 PM IST
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ग्राम पंचायत समैला (घोड़ी) के मतोली गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत के समापन पर मौजूद श्रद्धालु।
मतोली गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा हुई संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। जिले की ग्राम पंचायत समैला (घोड़ी) के मतोली गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को समापन हुआ। समापन अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।
अंतिम दिन यज्ञ में पूर्ण आहुति दी गई और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथावाचक पंडित शशि कांत शर्मा ने भागवत भक्ति के विभिन्न आयामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। भागवत का वास्तविक अर्थ भगवान में पूर्ण रूप से लीन हो जाना है। इस दौरान पूरा पंडाल बांके बिहारी लाल की जय के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इससे पहले कथा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। सातवें दिन कथावाचक ने भगवान श्री कृष्ण और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम प्रसंग के साथ रुक्मणी विवाह का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के 16,108 विवाहों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आठ प्रमुख पत्नियां रुक्मणी, जामवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा पटरानियां कहलाती हैं। उन्होंने श्रीमद् भागवत के द्वादश स्कंध का उल्लेख करते हुए कलयुग के स्वरूप की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कलयुग बढ़ेगा, वैसे-वैसे धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरण शक्ति में गिरावट आती जाएगी। उन्होंने कहा कि अंततः कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे व धर्म की पुनः स्थापना करेंगे। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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भगेड़ (बिलासपुर)। जिले की ग्राम पंचायत समैला (घोड़ी) के मतोली गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को समापन हुआ। समापन अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।
अंतिम दिन यज्ञ में पूर्ण आहुति दी गई और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथावाचक पंडित शशि कांत शर्मा ने भागवत भक्ति के विभिन्न आयामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। भागवत का वास्तविक अर्थ भगवान में पूर्ण रूप से लीन हो जाना है। इस दौरान पूरा पंडाल बांके बिहारी लाल की जय के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इससे पहले कथा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। सातवें दिन कथावाचक ने भगवान श्री कृष्ण और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम प्रसंग के साथ रुक्मणी विवाह का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के 16,108 विवाहों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आठ प्रमुख पत्नियां रुक्मणी, जामवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा पटरानियां कहलाती हैं। उन्होंने श्रीमद् भागवत के द्वादश स्कंध का उल्लेख करते हुए कलयुग के स्वरूप की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कलयुग बढ़ेगा, वैसे-वैसे धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरण शक्ति में गिरावट आती जाएगी। उन्होंने कहा कि अंततः कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे व धर्म की पुनः स्थापना करेंगे। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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