{"_id":"690b512906fcca9a0d0d8011","slug":"teachers-were-made-aware-about-the-use-of-ai-in-classroom-teaching-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-147832-2025-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: व्यथा का समाधान ही कथा है, सुनने से धुंधुकारी जैसा पापी भी होता है मुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: व्यथा का समाधान ही कथा है, सुनने से धुंधुकारी जैसा पापी भी होता है मुक्त
Wed, 05 Nov 2025 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 05 Nov 2025 11:51 PM IST
विज्ञापन
ग्राम पंचायत पंजगाईं के कुनणु में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के दौरान श्रद्धालु। संवाद
श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति रस से सराबोर हुआ माहौल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत पंजगाईं के कुनणु में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा प्रवक्ता आचार्य अरुण मोदगिल जी महाराज ने तीसरे दिन के प्रवचन में कहा कि व्यथा का समाधान ही कथा है। जब मनुष्य के जीवन में दुख, भ्रम या मोह बढ़ जाता है, तब श्रीमद्भागवत कथा ही वह दिव्य औषधि बन जाती है जो आत्मा को शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने धुंधुकारी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से बड़े से बड़ा पापी भी मोक्ष प्राप्त कर सकता है। धुंधुकारी जैसे अत्यंत दुराचारी व्यक्ति को भी जब कथा श्रवण का अवसर मिला, तो वह भी अपने सारे पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि भागवत कथा आत्मा को शुद्ध कर मोक्ष का द्वार खोलती है।
मनुष्य को इस कथा से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में कोई भी परिस्थिति हो, ईश्वर के नाम और कथा का स्मरण हमें सही मार्ग दिखाता है। तीसरे दिन की कथा में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट की।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत पंजगाईं के कुनणु में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा प्रवक्ता आचार्य अरुण मोदगिल जी महाराज ने तीसरे दिन के प्रवचन में कहा कि व्यथा का समाधान ही कथा है। जब मनुष्य के जीवन में दुख, भ्रम या मोह बढ़ जाता है, तब श्रीमद्भागवत कथा ही वह दिव्य औषधि बन जाती है जो आत्मा को शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने धुंधुकारी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से बड़े से बड़ा पापी भी मोक्ष प्राप्त कर सकता है। धुंधुकारी जैसे अत्यंत दुराचारी व्यक्ति को भी जब कथा श्रवण का अवसर मिला, तो वह भी अपने सारे पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि भागवत कथा आत्मा को शुद्ध कर मोक्ष का द्वार खोलती है।
विज्ञापन
मनुष्य को इस कथा से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में कोई भी परिस्थिति हो, ईश्वर के नाम और कथा का स्मरण हमें सही मार्ग दिखाता है। तीसरे दिन की कथा में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट की।
विज्ञापन