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Bilaspur News: महाशिवपुराण में सुनाई भगवान गणेश और कार्तिक की कथा
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शिव गौरी मंदिर सुन्हाणी में महाशिवपुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। शिव गौरी मंदिर सुन्हाणी में चल रही महाशिवपुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित राधा रमन शास्त्री ने संगत को प्रवचन देते हुए भगवान श्री गणेश और कार्तिक की जीवनी के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
इस दौरान उन्होंने बताया कि एक बार भगवान शंकर और पार्वती ने गणेश और कार्तिक की परीक्षा ली। इसमें पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने वाले को प्रथम पूज्य का पद देने की बात कही। प्रतियोगिता में दोनों ही ब्रह्मांड का चक्कर काटने निकले तो कार्तिक मोर पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने लगे और भगवान गणेश ने माता- पिता की परिक्रमा कर ली। पंडित राधा रमन शास्त्री ने कहा कि इस परिक्रमा के बाद जब कार्तिकेय अपने माता-पिता के पास पहुंचे तो देखा कि गणेश पहले ही मौजूद थे। गणेश के इस मातृ एवं पितृ भक्ति को देख भगवान शंकर और पार्वती ने किसी भी कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पहली पूजा का वरदान दिया। शिव महापुराण कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा आरती के बाद श्रद्धालुओं ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कार्तिक व गणेश के विवाह की कथा का भी वर्णन कर भक्तों को मंत्र मुक्त कर दिया। मंदिर के महंत बाबा अर्भय गिरी जी ने बताया कि तीन जून को हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया है। इसमें समस्त इलाका वासी व संत समाज भाग लेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। शिव गौरी मंदिर सुन्हाणी में चल रही महाशिवपुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित राधा रमन शास्त्री ने संगत को प्रवचन देते हुए भगवान श्री गणेश और कार्तिक की जीवनी के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
इस दौरान उन्होंने बताया कि एक बार भगवान शंकर और पार्वती ने गणेश और कार्तिक की परीक्षा ली। इसमें पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने वाले को प्रथम पूज्य का पद देने की बात कही। प्रतियोगिता में दोनों ही ब्रह्मांड का चक्कर काटने निकले तो कार्तिक मोर पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने लगे और भगवान गणेश ने माता- पिता की परिक्रमा कर ली। पंडित राधा रमन शास्त्री ने कहा कि इस परिक्रमा के बाद जब कार्तिकेय अपने माता-पिता के पास पहुंचे तो देखा कि गणेश पहले ही मौजूद थे। गणेश के इस मातृ एवं पितृ भक्ति को देख भगवान शंकर और पार्वती ने किसी भी कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पहली पूजा का वरदान दिया। शिव महापुराण कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा आरती के बाद श्रद्धालुओं ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कार्तिक व गणेश के विवाह की कथा का भी वर्णन कर भक्तों को मंत्र मुक्त कर दिया। मंदिर के महंत बाबा अर्भय गिरी जी ने बताया कि तीन जून को हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया है। इसमें समस्त इलाका वासी व संत समाज भाग लेगा।
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