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अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में पैरवी तेज करें : डीसी
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उपायुक्त ने कहा - पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता
सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में दर्ज मामलों की प्रभावी पैरवी कर पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश उपायुक्त राहुल कुमार ने बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।
बैठक में अधिनियम के तहत जिले में दर्ज मामलों और पीड़ितों को दी गई राहत राशि की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 के दौरान अधिनियम के अंतर्गत छह एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से एक मामले में जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि चार मामलों में जांच जारी है। एक मामले को जांच के उपरांत बंद कर दिया गया है।
बैठक में बताया कि अधिनियम के तहत सभी छह पीड़ितों को कुल 2 लाख 45 हजार रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। वहीं, जिले में इस अधिनियम से संबंधित 43 मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। उपायुक्त ने जिला न्यायवादी को लंबित मामलों की सुदृढ़ और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। साथ ही संबंधित विभागों को अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में दर्ज मामलों की प्रभावी पैरवी कर पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश उपायुक्त राहुल कुमार ने बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।
बैठक में अधिनियम के तहत जिले में दर्ज मामलों और पीड़ितों को दी गई राहत राशि की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 के दौरान अधिनियम के अंतर्गत छह एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनमें से एक मामले में जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि चार मामलों में जांच जारी है। एक मामले को जांच के उपरांत बंद कर दिया गया है।
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बैठक में बताया कि अधिनियम के तहत सभी छह पीड़ितों को कुल 2 लाख 45 हजार रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। वहीं, जिले में इस अधिनियम से संबंधित 43 मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। उपायुक्त ने जिला न्यायवादी को लंबित मामलों की सुदृढ़ और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। साथ ही संबंधित विभागों को अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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