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Bilaspur News: सियाराम नाटक मंडली में दिखाया गया सीता हरण प्रसंग
Sat, 01 Nov 2025 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 01 Nov 2025 11:13 PM IST
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सियाराम नाटक मंडली बच्छरेटृ की ओर से चल रहे धार्मिक नाटक का दृश्य। संवाद
सातवें दिन पंचवटी से सीता हरण तक की कथा का हुआ मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई(बिलासपुर)। सियाराम नाटक मंडली बच्छरेटृ की ओर से चल रहे धार्मिक नाटक में सातवें दिन सीता हरण प्रसंग का मंचन किया गया। मंचन के दौरान पंचवटी में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण का निवास दिखाया गया। इसी बीच शूर्पणखा का आगमन हुआ और उसने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे लक्ष्मण ने अस्वीकार कर उसे दंडित किया।
इसके बाद कथा में रावण के दरबार का दृश्य दिखाया गया, जहां रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा का अपमान सुनकर बदला लेने की योजना बनाई। मारीच के सोने का हिरण बनकर उसके सहयोग से रावण ने राम को सीता से दूर किया। जैसे ही राम और लक्ष्मण वन में चले गए, रावण साधु के वेश में पहुंचा और सीता का हरण कर लिया। सीता को बचाने का प्रयास करते हुए जटायु ने रावण से संघर्ष किया, परंतु वीरगति को प्राप्त हुआ। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। नाटक में भगवान राम की भूमिका रामकुमार, लक्ष्मण की लकी, सीता की अनीश, रावण की विजय कुमार, शूर्पणखा की पंकज, जटायु की संदीप, योगी की तरसेम, मारीच की अश्विनी, मेघनाथ की मोनू सोनी, और भीषण की भूमिका अबू ने निभाई। सभी कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सीता हरण का यह प्रसंग धार्मिक वातावरण में दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई(बिलासपुर)। सियाराम नाटक मंडली बच्छरेटृ की ओर से चल रहे धार्मिक नाटक में सातवें दिन सीता हरण प्रसंग का मंचन किया गया। मंचन के दौरान पंचवटी में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण का निवास दिखाया गया। इसी बीच शूर्पणखा का आगमन हुआ और उसने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे लक्ष्मण ने अस्वीकार कर उसे दंडित किया।
इसके बाद कथा में रावण के दरबार का दृश्य दिखाया गया, जहां रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा का अपमान सुनकर बदला लेने की योजना बनाई। मारीच के सोने का हिरण बनकर उसके सहयोग से रावण ने राम को सीता से दूर किया। जैसे ही राम और लक्ष्मण वन में चले गए, रावण साधु के वेश में पहुंचा और सीता का हरण कर लिया। सीता को बचाने का प्रयास करते हुए जटायु ने रावण से संघर्ष किया, परंतु वीरगति को प्राप्त हुआ। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। नाटक में भगवान राम की भूमिका रामकुमार, लक्ष्मण की लकी, सीता की अनीश, रावण की विजय कुमार, शूर्पणखा की पंकज, जटायु की संदीप, योगी की तरसेम, मारीच की अश्विनी, मेघनाथ की मोनू सोनी, और भीषण की भूमिका अबू ने निभाई। सभी कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सीता हरण का यह प्रसंग धार्मिक वातावरण में दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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