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पॉली हाउस लगाने के लिए ऋण के जंजाल में फंसे किसान
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जुखाला (बिलासपुर)। जिले में वर्ष 2007-08 के दौरान उद्यान विभाग के सौजन्य से फूलों की खेती करने को पॉलीहाउस लगाने के लिए विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर किसान अब इसके जंजाल में बुरी तरह फंस गए हैं।
इन किसानों की जमीनें बैंक ने अपने नाम करवा ली हैं और ऋण की राशि 10 लाख से बढ़कर 50 लाख तक हो गई है। किसान मदद के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर सहित कई नेताओं से मिल चुके हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसान बाबू राम, मनोहर लाल, राजेंद्र, शिल्लु, सुभाष, नरेंद्र, दुर्गा राम, संजू, लेखराम, बलदेव, श्याम लाल, जीत राम, रतन लाल आदि ने कहा कि जलवायु उपयुक्त नहीं होने के चलते फूलों की खेती नहीं चल पाई और वह बैंक का ऋण नहीं लौटा सके।
जिन किसानों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लिया था उनके मामले सेटल हो चुके हैं। इन बैंकों ने मूलधन का 10 फीसदी लेकर ऋण मामलों को सेटल कर दिया है, लेकिन कुछ किसानों ने राज्य सहकारी बैंक और कृषि एवं ग्रमीण बैंक से ऋण लिया था। ये लोग अभी तक ऋण के जाल में फंसे हैं। इस मामले का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आश्वासन के बाद भी हल नहीं निकल पाया है। उनके 10 लाख रुपये के ऋण 40 से 50 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं। उन्होंने मांग की कि उनके ऋणों की भी सेटलमेंट की जाए।
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इन किसानों की जमीनें बैंक ने अपने नाम करवा ली हैं और ऋण की राशि 10 लाख से बढ़कर 50 लाख तक हो गई है। किसान मदद के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर सहित कई नेताओं से मिल चुके हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसान बाबू राम, मनोहर लाल, राजेंद्र, शिल्लु, सुभाष, नरेंद्र, दुर्गा राम, संजू, लेखराम, बलदेव, श्याम लाल, जीत राम, रतन लाल आदि ने कहा कि जलवायु उपयुक्त नहीं होने के चलते फूलों की खेती नहीं चल पाई और वह बैंक का ऋण नहीं लौटा सके।
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जिन किसानों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लिया था उनके मामले सेटल हो चुके हैं। इन बैंकों ने मूलधन का 10 फीसदी लेकर ऋण मामलों को सेटल कर दिया है, लेकिन कुछ किसानों ने राज्य सहकारी बैंक और कृषि एवं ग्रमीण बैंक से ऋण लिया था। ये लोग अभी तक ऋण के जाल में फंसे हैं। इस मामले का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आश्वासन के बाद भी हल नहीं निकल पाया है। उनके 10 लाख रुपये के ऋण 40 से 50 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं। उन्होंने मांग की कि उनके ऋणों की भी सेटलमेंट की जाए।
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