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Bilaspur News: सिल्ह से माकड़ी गांव तक नहीं पक्का रास्ता
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बरसात में दो नाले पार करते समय बना रहता है हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। कोटधार क्षेत्र की जेजवी पंचायत के अंतर्गत सिल्ह से माकड़ी गांव तक पक्का रास्ता न होने से ग्रामीणों को लंबे समय से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में हालात और भी विकट हो जाते हैं। कच्चे रास्ते में दो जगह नाले बहते हैं। बरसात में तेज बहाव होने से स्कूली बच्चों समेत ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है।
स्थानीय निवासी राज कुमार, बली राम, जय सिंह, संतराम, सुभाष चंद, सावित्री देवी, रजनी, विमला देवी, जयमल, ख्यालों देवी सहित अन्य लोगों ने प्रशासन और सरकार से इस मार्ग को पक्का करवाने और नालों पर पुलिया बनाने की मांग की है। करीब दो दर्जन परिवार रोजाना इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन हर साल बरसात उनके लिए आफत बनकर आती है। न तो पंचायत ने कोई कदम उठाया और न ही प्रशासन ने गंभीरता दिखाई। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 30 साल पहले जब यह क्षेत्र पपलोआ पंचायत के अधीन था, तब श्मशानघाट तक पक्का रास्ता बना था, लेकिन उसके आगे अब तक कोई निर्माण नहीं हुआ। वर्तमान में करीब एक किलोमीटर लंबा यह रास्ता न केवल कच्चा है, बल्कि खतरनाक भी बन चुका है। एसडीएम झंडूता अर्शिया शर्मा ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या उनके संज्ञान में आई है। प्रशासन जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई करेगा और लोगों को राहत पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। कोटधार क्षेत्र की जेजवी पंचायत के अंतर्गत सिल्ह से माकड़ी गांव तक पक्का रास्ता न होने से ग्रामीणों को लंबे समय से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में हालात और भी विकट हो जाते हैं। कच्चे रास्ते में दो जगह नाले बहते हैं। बरसात में तेज बहाव होने से स्कूली बच्चों समेत ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है।
स्थानीय निवासी राज कुमार, बली राम, जय सिंह, संतराम, सुभाष चंद, सावित्री देवी, रजनी, विमला देवी, जयमल, ख्यालों देवी सहित अन्य लोगों ने प्रशासन और सरकार से इस मार्ग को पक्का करवाने और नालों पर पुलिया बनाने की मांग की है। करीब दो दर्जन परिवार रोजाना इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन हर साल बरसात उनके लिए आफत बनकर आती है। न तो पंचायत ने कोई कदम उठाया और न ही प्रशासन ने गंभीरता दिखाई। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 30 साल पहले जब यह क्षेत्र पपलोआ पंचायत के अधीन था, तब श्मशानघाट तक पक्का रास्ता बना था, लेकिन उसके आगे अब तक कोई निर्माण नहीं हुआ। वर्तमान में करीब एक किलोमीटर लंबा यह रास्ता न केवल कच्चा है, बल्कि खतरनाक भी बन चुका है। एसडीएम झंडूता अर्शिया शर्मा ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या उनके संज्ञान में आई है। प्रशासन जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई करेगा और लोगों को राहत पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
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