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सड़क 310 खसरा नंबरों पर कहां बनी, नहीं रिकार्ड
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण मामले को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। वन विभाग ने जो खसरा नंबर सड़क निर्माण को दिए हैं उन पर सड़क का निर्माण हुआ ही नहीं है जिससे साफ है कि एनएचएआई और सड़क निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने अपनी सुविधा के अनुसार सभी नियमों को ताक पर रखकर फोरलेन का निर्माण कर डाला है।
फोरलेन विस्थापित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने यहां जारी बयान में कहा कि समिति ने राजस्व विभाग की नकल शाखा से सड़क निर्माण के नक्शों की मांग की थी जिसमें श्रीनयना देवी के 13, सदर के आठ, झंडूता के दस और घुमारवीं के 13 गांव के 310 खसरा नंबरों से नक्शा कॉपी और फिल्ड बुक और ततीमें मांगे गए थे।
इसके बाद संबंधित विभाग ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट एनएचएआई से तलब की जिसके बाद एनएचएआई की ओर से जो रिकॉर्ड मिला उसमें उक्त 310 खसरा नंबरों को सड़क निर्माण का कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है। इसके बाद अब फिर से राजस्व विभाग ने उक्त इकाई को इस जानकारी को देने के लिए लिखा है। जबकि उक्त नकलों को मुहैया करवाने की अंतिम तारीख 5 नवंबर थी लेकिन अभी तक यह जानकारी प्रार्थी को नहीं मिल पाई।
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फोरलेन विस्थापित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने बताया कि नकल कॉपी और फिल्ड बुक मुहैया करवाने का समय कॉपी एजेंसी की ओर से पांच नवंबर का दिया था लेकिन अभी तक कॉपी नहीं मिल पाई है। जब ऑफिस में पता किया गया तो वहां बताया कि एनएचएआई द्वारा दिए गए रिकॉर्ड में उक्त नंबर नहीं मिल पा रहे हैं। इस संबंध में फिर से एनएचएआई को लिखा गया है।
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फोरलेन विस्थापित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने यहां जारी बयान में कहा कि समिति ने राजस्व विभाग की नकल शाखा से सड़क निर्माण के नक्शों की मांग की थी जिसमें श्रीनयना देवी के 13, सदर के आठ, झंडूता के दस और घुमारवीं के 13 गांव के 310 खसरा नंबरों से नक्शा कॉपी और फिल्ड बुक और ततीमें मांगे गए थे।
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इसके बाद संबंधित विभाग ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट एनएचएआई से तलब की जिसके बाद एनएचएआई की ओर से जो रिकॉर्ड मिला उसमें उक्त 310 खसरा नंबरों को सड़क निर्माण का कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है। इसके बाद अब फिर से राजस्व विभाग ने उक्त इकाई को इस जानकारी को देने के लिए लिखा है। जबकि उक्त नकलों को मुहैया करवाने की अंतिम तारीख 5 नवंबर थी लेकिन अभी तक यह जानकारी प्रार्थी को नहीं मिल पाई।
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फोरलेन विस्थापित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने बताया कि नकल कॉपी और फिल्ड बुक मुहैया करवाने का समय कॉपी एजेंसी की ओर से पांच नवंबर का दिया था लेकिन अभी तक कॉपी नहीं मिल पाई है। जब ऑफिस में पता किया गया तो वहां बताया कि एनएचएआई द्वारा दिए गए रिकॉर्ड में उक्त नंबर नहीं मिल पा रहे हैं। इस संबंध में फिर से एनएचएआई को लिखा गया है।