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महिला आरक्षण पर भाजपा की मंशा पर उठे सवाल : राजेश धर्माणी
Sat, 18 Apr 2026 11:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 18 Apr 2026 11:26 PM IST
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बोले-कांग्रेस कांग्रेस पार्टी शुरू से ही महिला आरक्षण की रही समर्थक
भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही महिला आरक्षण की समर्थक रही है, जबकि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
घुमारवीं में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण कांग्रेस की मूल सोच का हिस्सा रहा है और पार्टी ने हमेशा महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। कहा कि वर्ष 1989 में जब देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे, उस समय महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक लोकसभा से पारित किया गया था। उस दौरान कांग्रेस के पास लोकसभा में बहुमत था, लेकिन राज्यसभा में पर्याप्त संख्या न होने के कारण यह विधेयक आगे पारित नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भारतीय जनता पार्टी सहित कुछ अन्य दलों ने इस बिल का विरोध किया था। मंत्री ने कहा कि बाद में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही, तब भी इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और कांग्रेस की मंशा थी कि इस मंच के माध्यम से महिला आरक्षण को मजबूत आधार दिया जाए। भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज भी उनकी मंशा महिला आरक्षण लागू करने की नहीं, बल्कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने की है।
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भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने महिला आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही महिला आरक्षण की समर्थक रही है, जबकि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
घुमारवीं में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण कांग्रेस की मूल सोच का हिस्सा रहा है और पार्टी ने हमेशा महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। कहा कि वर्ष 1989 में जब देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे, उस समय महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक लोकसभा से पारित किया गया था। उस दौरान कांग्रेस के पास लोकसभा में बहुमत था, लेकिन राज्यसभा में पर्याप्त संख्या न होने के कारण यह विधेयक आगे पारित नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भारतीय जनता पार्टी सहित कुछ अन्य दलों ने इस बिल का विरोध किया था। मंत्री ने कहा कि बाद में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही, तब भी इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और कांग्रेस की मंशा थी कि इस मंच के माध्यम से महिला आरक्षण को मजबूत आधार दिया जाए। भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज भी उनकी मंशा महिला आरक्षण लागू करने की नहीं, बल्कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने की है।
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