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Bilaspur News: भरण-पोषण मामले में न्यायिक हिरासत में व्यक्ति को राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज
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गैर जमानती वारंट रद्द कराने की अर्जी निचली अदालत में लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने व्यक्ति की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। व्यक्ति भरण-पोषण मामले में न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गैर जमानती वारंट रद्द कराने की अर्जी निचली अदालत में लंबित है, इसलिए सत्र न्यायालय में नियमित जमानत नहीं मिल सकती।
व्यक्ति तहसील श्री नयना देवी जी का निवासी है। उसने अपनी याचिका में कहा था कि उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के तहत न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसलिए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए। सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अदालत को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजय कुमार ने 17 जुलाई को जेएमएफसी झंडूता की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। वहां गैर जमानती वारंट रद्द करने के लिए एक आवेदन भी दायर किया गया था, जो अभी लंबित है। ट्रायल कोर्ट ने उसे 28 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का रिमांड आदेश वैध है। आवेदक के पास प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध है और उसे उसी अदालत से राहत मांगनी चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि सत्र न्यायालय की शक्तियों का उपयोग लंबित न्यायिक कार्यवाही को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। व्यक्ति को पहले निचली अदालत में अपनी अर्जी पर सुनवाई का इंतजार करना होगा। गैर जमानती वारंट रद्द करने का आवेदन अभी भी जेएमएफसी झंडूता की अदालत में विचाराधीन है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश की कोई भी टिप्पणी निचली अदालत के निर्णय को प्रभावित नहीं करेगी। संबंधित अदालत उस आवेदन का स्वतंत्र और कानून के अनुरूप निर्णय करेगी। अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका को निराधार पाया। इसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने जोर दिया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। आवेदक को उचित कानूनी उपचार के लिए सही मंच पर जाना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने व्यक्ति की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। व्यक्ति भरण-पोषण मामले में न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गैर जमानती वारंट रद्द कराने की अर्जी निचली अदालत में लंबित है, इसलिए सत्र न्यायालय में नियमित जमानत नहीं मिल सकती।
व्यक्ति तहसील श्री नयना देवी जी का निवासी है। उसने अपनी याचिका में कहा था कि उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के तहत न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसलिए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए। सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अदालत को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजय कुमार ने 17 जुलाई को जेएमएफसी झंडूता की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। वहां गैर जमानती वारंट रद्द करने के लिए एक आवेदन भी दायर किया गया था, जो अभी लंबित है। ट्रायल कोर्ट ने उसे 28 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का रिमांड आदेश वैध है। आवेदक के पास प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध है और उसे उसी अदालत से राहत मांगनी चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि सत्र न्यायालय की शक्तियों का उपयोग लंबित न्यायिक कार्यवाही को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। व्यक्ति को पहले निचली अदालत में अपनी अर्जी पर सुनवाई का इंतजार करना होगा। गैर जमानती वारंट रद्द करने का आवेदन अभी भी जेएमएफसी झंडूता की अदालत में विचाराधीन है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश की कोई भी टिप्पणी निचली अदालत के निर्णय को प्रभावित नहीं करेगी। संबंधित अदालत उस आवेदन का स्वतंत्र और कानून के अनुरूप निर्णय करेगी। अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका को निराधार पाया। इसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने जोर दिया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। आवेदक को उचित कानूनी उपचार के लिए सही मंच पर जाना चाहिए।
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