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भगवान विष्णु ने अपनी माया से सृष्टि में जीवन को जीने का संदेश दिया : बृजेश गोस्वामी
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बिलासपुर के औहर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
- औहर में श्रीमद भागवत कथा का हुआ शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पंचायत औहर के प्रतिनिधियों के प्रयासों और आम जनता के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा बुधवार से शुरू हुई। इससे पहले औहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड बाजे की अगुआई में पावन श्रीमद् भागवत कथा ग्रंथ को आयोजन स्थल से मंदिर तक लाया गया। औहर पंचायत के उपप्रधान रणजीत वर्धन ने बताया कि इस कथा यज्ञ में वृंदावन से सादर आमंत्रित कथा वाचक बृजेश गोस्वामी जी प्रवचन कर रहे हैं। पहले दिन प्रवचन करते हुए बृजेश गोस्वामी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा और रामायण जैसे पावन ग्रंथों के बारे में बहुत ही सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि देवताओं तक को अपने में वशीभूत करने वाले मायावी का नाम ही तो विष्णु है। भगवान विष्णु ने अपनी माया से सृष्टि में जीवन को जीने का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण के रूप में जहां उन्होंने रास रचाया, वहीं भगवान श्रीराम के रूप अपनी माया का संचार कर गृहस्थ, रिश्ते और नाते प्रेम की अविरल धारा का प्रवाह किया। उन्होंने कहा कि रावण कोई आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। उसकी प्रवृत्ति दैवीय थी, जिसने भगवान शंकर तक को अपने वश में कर लिया था तो चिंतन करों कि वह कितना बड़ा भक्त था। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के हाथों मृत्यु का वरण प्राप्त करने के लिए रावण ने जो लीला रची वह वास्तव में अद्भुत थी। भगवान राम ने जब लंका पर चढ़ाई की तो रावण का वध प्रभु के हाथों हुआ। रावण ने अपने सभी सगे संबंधियों की मृत्यु के लिए भगवान राम का सहारा लिया और उनके शुभ हाथों से यह कार्य जानबूझ कर करवाया। कथा का 28 मई को समापन होगा और इसी रोज विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इस मौके पर ममता देवी, सरोज कुमारी, संध्या देवी, राम प्यारी और बबली देवी, कर्म चंद, मदन वर्मा और मनीष कुमार आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पंचायत औहर के प्रतिनिधियों के प्रयासों और आम जनता के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा बुधवार से शुरू हुई। इससे पहले औहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड बाजे की अगुआई में पावन श्रीमद् भागवत कथा ग्रंथ को आयोजन स्थल से मंदिर तक लाया गया। औहर पंचायत के उपप्रधान रणजीत वर्धन ने बताया कि इस कथा यज्ञ में वृंदावन से सादर आमंत्रित कथा वाचक बृजेश गोस्वामी जी प्रवचन कर रहे हैं। पहले दिन प्रवचन करते हुए बृजेश गोस्वामी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा और रामायण जैसे पावन ग्रंथों के बारे में बहुत ही सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि देवताओं तक को अपने में वशीभूत करने वाले मायावी का नाम ही तो विष्णु है। भगवान विष्णु ने अपनी माया से सृष्टि में जीवन को जीने का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण के रूप में जहां उन्होंने रास रचाया, वहीं भगवान श्रीराम के रूप अपनी माया का संचार कर गृहस्थ, रिश्ते और नाते प्रेम की अविरल धारा का प्रवाह किया। उन्होंने कहा कि रावण कोई आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। उसकी प्रवृत्ति दैवीय थी, जिसने भगवान शंकर तक को अपने वश में कर लिया था तो चिंतन करों कि वह कितना बड़ा भक्त था। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के हाथों मृत्यु का वरण प्राप्त करने के लिए रावण ने जो लीला रची वह वास्तव में अद्भुत थी। भगवान राम ने जब लंका पर चढ़ाई की तो रावण का वध प्रभु के हाथों हुआ। रावण ने अपने सभी सगे संबंधियों की मृत्यु के लिए भगवान राम का सहारा लिया और उनके शुभ हाथों से यह कार्य जानबूझ कर करवाया। कथा का 28 मई को समापन होगा और इसी रोज विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इस मौके पर ममता देवी, सरोज कुमारी, संध्या देवी, राम प्यारी और बबली देवी, कर्म चंद, मदन वर्मा और मनीष कुमार आदि ग्रामीण मौजूद रहे।