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Bilaspur News: डडनाल में वन भूमि पर मलबा डंपिंग की तत्काल जांच के आदेश
Sun, 28 Dec 2025 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:30 PM IST
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वाइल्डलाइफ विंग ने शुरू की कार्रवाई, अरण्यपाल बिलासपुर करेंगे जांच
मुख्यमत्री को दी गई शिकायत पर कार्रवाई के तहत अरण्यपाल करेंगे जांच
मामले में हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना होने की है शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वाइल्डलाइफ विंग ने बिलासपुर जिले के मौजा डडनाल क्षेत्र में वन भूमि पर कथित तौर पर मलबा डंपिंग की शिकायत पर सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। यह शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय के जरिए पहुंची थी, जिसमें फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या उसकी निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि कीरतपुर-नेरचौक या संबंधित फोरलेन परियोजना के तहत सड़क निर्माण से निकला मलबा निर्दिष्ट निजी भूमि की बजाय सरकारी वन भूमि पर फेंका जा रहा है। डंपिंग पूरी तरह बिना अनुमति के हो रही है। रिटेनिंग वॉल या अन्य सुरक्षा उपायों का कोई इंतजाम नहीं किया गया, जिससे पर्यावरण और स्थानीय सुरक्षा को खतरा है। यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के बार-बार दिए गए निर्देशों का खुला उल्लंघन है, जहां अवैध मलबा डंपिंग पर सख्ती के आदेश पहले भी जारी हो चुके हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्डलाइफ) के कार्यालय से जारी आदेश में अरण्यपाल बिलासपुर को निर्देश दिया गया है कि मौके पर जाकर आरोपों की गहन जांच करें और सत्यता पाए जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। जानकारी के अनुसार, वन भूमि की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अधिकारी जल्द ही क्षेत्र का दौरा कर मलबे की मात्रा, प्रकार और पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करेंगे। अवैध डंपिंग का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यदि उल्लंघन साबित हुआ तो संबंधित एजेंसी या ठेकेदार पर भारी जुर्माना, मुकदमा या मलबा हटाने के आदेश जारी हो सकते हैं। भविष्य में अनुमति प्रक्रिया को और सख्त करने पर विचार किया जाएगा। यह मामला बिलासपुर क्षेत्र में फोरलेन परियोजनाओं से जुड़े पुराने विवादों को फिर से सामने ला रहा है, जहां पहले भी गोबिंद सागर जलाशय और वन क्षेत्रों में अवैध डंपिंग के कई मामले उच्च न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल वन्यजीवों को खतरे में डालती हैं, बल्कि भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को भी न्योता देती हैं। वन विभाग ने जांच को पारदर्शी बनाए रखने और जल्द रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। यदि नए तथ्य सामने आए तो कार्रवाई और सख्त हो सकती है।
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मुख्यमत्री को दी गई शिकायत पर कार्रवाई के तहत अरण्यपाल करेंगे जांच
मामले में हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना होने की है शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वाइल्डलाइफ विंग ने बिलासपुर जिले के मौजा डडनाल क्षेत्र में वन भूमि पर कथित तौर पर मलबा डंपिंग की शिकायत पर सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। यह शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय के जरिए पहुंची थी, जिसमें फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या उसकी निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि कीरतपुर-नेरचौक या संबंधित फोरलेन परियोजना के तहत सड़क निर्माण से निकला मलबा निर्दिष्ट निजी भूमि की बजाय सरकारी वन भूमि पर फेंका जा रहा है। डंपिंग पूरी तरह बिना अनुमति के हो रही है। रिटेनिंग वॉल या अन्य सुरक्षा उपायों का कोई इंतजाम नहीं किया गया, जिससे पर्यावरण और स्थानीय सुरक्षा को खतरा है। यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के बार-बार दिए गए निर्देशों का खुला उल्लंघन है, जहां अवैध मलबा डंपिंग पर सख्ती के आदेश पहले भी जारी हो चुके हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्डलाइफ) के कार्यालय से जारी आदेश में अरण्यपाल बिलासपुर को निर्देश दिया गया है कि मौके पर जाकर आरोपों की गहन जांच करें और सत्यता पाए जाने पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। जानकारी के अनुसार, वन भूमि की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अधिकारी जल्द ही क्षेत्र का दौरा कर मलबे की मात्रा, प्रकार और पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करेंगे। अवैध डंपिंग का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यदि उल्लंघन साबित हुआ तो संबंधित एजेंसी या ठेकेदार पर भारी जुर्माना, मुकदमा या मलबा हटाने के आदेश जारी हो सकते हैं। भविष्य में अनुमति प्रक्रिया को और सख्त करने पर विचार किया जाएगा। यह मामला बिलासपुर क्षेत्र में फोरलेन परियोजनाओं से जुड़े पुराने विवादों को फिर से सामने ला रहा है, जहां पहले भी गोबिंद सागर जलाशय और वन क्षेत्रों में अवैध डंपिंग के कई मामले उच्च न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल वन्यजीवों को खतरे में डालती हैं, बल्कि भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को भी न्योता देती हैं। वन विभाग ने जांच को पारदर्शी बनाए रखने और जल्द रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। यदि नए तथ्य सामने आए तो कार्रवाई और सख्त हो सकती है।
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