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Bilaspur News: एकमात्र भगवान ही निस्वार्थ भाव से रखते हैं भक्तों का ख्याल
Sun, 12 Oct 2025 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 12 Oct 2025 11:51 PM IST
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बिलासपुर के रौड़ा सेक्टर में कथा सुनते हुए श्रद्धालु। संवाद
श्रीमद्भागवत कथा में किया श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के रौड़ा सेक्टर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से आचार्य संदीपन वशिष्ठ ने अपने मधुर वचनों से श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
आचार्य वशिष्ठ ने प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं, जिनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जामवंती, कालिंदी, मित्रबिंदा, नाग्नजीती, भद्रा और लक्ष्मणा प्रमुख थीं। उन्होंने बताया कि नरकासुर नामक राक्षस राजा ने 16,100 राजकुमारियों को बंदी बना लिया था। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने उसका वध कर इन सभी कन्याओं को मुक्ति दिलाई और समाज में उनका सम्मान लौटाने के लिए एक साथ सभी से विवाह किया। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि इस संसार में अधिकांश रिश्ते किसी न किसी स्वार्थ से बंधे होते हैं, लेकिन भगवान ही ऐसे हैं जो निस्वार्थ भाव से अपने भक्तों को चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रभु किसी भक्त का हाथ थाम लेते हैं तो फिर कभी नहीं छोड़ते। इसी भाव ने भक्तों के मन में गहरी आस्था का संचार किया। कथा के दौरान श्रोतागण भावविभोर होकर भक्ति गीतों और कीर्तन पर झूम उठे। कई भक्तों की आंखों से आंसू झरने लगे। वातावरण जय श्रीकृष्ण, हरि नाम संकीर्तन’ के जयघोषों से गूंज उठा।
कथा के उपरांत आयोजक संजीव निर्मोही और अधिवक्ता मदन राणा ने सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। उन्होंने बताया कि यह कथा श्रृंखला पूरे सप्ताह चलेगी, जिसमें हर दिन अलग-अलग प्रसंगों का वर्णन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के रौड़ा सेक्टर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से आचार्य संदीपन वशिष्ठ ने अपने मधुर वचनों से श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
आचार्य वशिष्ठ ने प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं, जिनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जामवंती, कालिंदी, मित्रबिंदा, नाग्नजीती, भद्रा और लक्ष्मणा प्रमुख थीं। उन्होंने बताया कि नरकासुर नामक राक्षस राजा ने 16,100 राजकुमारियों को बंदी बना लिया था। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने उसका वध कर इन सभी कन्याओं को मुक्ति दिलाई और समाज में उनका सम्मान लौटाने के लिए एक साथ सभी से विवाह किया। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि इस संसार में अधिकांश रिश्ते किसी न किसी स्वार्थ से बंधे होते हैं, लेकिन भगवान ही ऐसे हैं जो निस्वार्थ भाव से अपने भक्तों को चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रभु किसी भक्त का हाथ थाम लेते हैं तो फिर कभी नहीं छोड़ते। इसी भाव ने भक्तों के मन में गहरी आस्था का संचार किया। कथा के दौरान श्रोतागण भावविभोर होकर भक्ति गीतों और कीर्तन पर झूम उठे। कई भक्तों की आंखों से आंसू झरने लगे। वातावरण जय श्रीकृष्ण, हरि नाम संकीर्तन’ के जयघोषों से गूंज उठा।
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कथा के उपरांत आयोजक संजीव निर्मोही और अधिवक्ता मदन राणा ने सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। उन्होंने बताया कि यह कथा श्रृंखला पूरे सप्ताह चलेगी, जिसमें हर दिन अलग-अलग प्रसंगों का वर्णन होगा।
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