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भूमि अधिग्रहण में बरती अनियमिताओं पर फर्द/बदर लगाने पर समिति ने उठाए सवाल
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के भूमि अधिग्रहण में बरती अनियमितताओं पर उनकी नियमानुसार दुरुस्ती करने के लिए भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर की ओर से फर्द/ बदर लगाने के बारे में एसडीएम सदर को दी गई रिपोर्ट पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने कड़ा एतराज जताया है। समिति ने भू अर्जन अधिकारी की इस टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भू अर्जन अधिकारी बताएं कि गंभीर अनियमितताओं की फर्द/बदर कब लगाई जाती है।
समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि उपरोक्त परियोजना में किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरती गई हैं।
इस परियोजना में रिकॉर्ड पढ़ने योग्य न होने, मुसाबी में दर्ज करुकान लिखने से छोड़ देने, बट्टा नंबर न डालने, पैमाने के अनुसार करुकान दर्ज न करने, मुसाबी का मौका पर बनाए गए ततिमाजात में सही मिलान न होने, अधिगृहीत की गई भूमि और शेष बची निजी भूमि का सही क्षेत्रफल न निकालने, हर दो मुहालों की सीमाओं का आपस में सही मिलान न होने, एक मुहाल की भूमि को दूसरे मुहाल में दर्ज करना आदि अनियमितताएं पाई गई हैं। जिससे अब मौका पर निशानदेही करने, जमाबंदियों में अमल करने, मोमियों में तरमीम करने, फर्द कब्जा तैयार करने, बै-हिब्बा तबादला, तब्दीली मलकीयत केंद्र सरकार राज्य सरकार के नाम निहित करने, फॉरेस्ट डायवर्सन करने, यहां तक कि नाजायज कब्जे की मिसलें तैयार करने तक दिक्कतें पैदा हो गई हैं। जिस पर तहसीलदार सदर ने जमाबंदियों में अमल करने का प्रमाण पत्र जमा करने के आदेश एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण की इकाई को जारी किए गए थे।
इन आदेशों पर भू अर्जन अधिकारी सिद्धार्थ आचार्य ने उपरोक्त अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए एसडीएम सदर को पत्र संख्या 672 जो कि 15 जुलाई को जारी किया गया में टिप्पणी करते हुए लिखा कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को चाहिए था कि जब आरटीआई में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी थी तो फर्द बदर लगाकर दुरुस्ती करवाते। मदन लाल शर्मा ने कहा कि इंतकालों में पाई गई गई अनियमितताओं में फर्द बदर तब लगाईं जाती हैं, जब संबंधित इंतकालों में किसी व्यक्ति विशेष का नाम आदि छूट गया हो या भूमि का क्षेत्रफल निकालते समय जमा घटाने में गलती से कोई अंक लिख दिया हो, लेकिन फोरलेन के इंतकालों में गंभीर गलतियों की पुष्टि हुई है। जिसमें फर्द बदर लगाकर छुटकारा नहीं पाया जा सकता है। समिति ने राजस्व सचिव प्रदेश सरकार से मांग की है कि उपरोक्त फोरलेन के गंभीर विषयों पर उचित कार्रवाई की जाए। ताकि राजस्व ता तारीख मुकम्मल रखा जा सके।
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समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि उपरोक्त परियोजना में किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरती गई हैं।
इस परियोजना में रिकॉर्ड पढ़ने योग्य न होने, मुसाबी में दर्ज करुकान लिखने से छोड़ देने, बट्टा नंबर न डालने, पैमाने के अनुसार करुकान दर्ज न करने, मुसाबी का मौका पर बनाए गए ततिमाजात में सही मिलान न होने, अधिगृहीत की गई भूमि और शेष बची निजी भूमि का सही क्षेत्रफल न निकालने, हर दो मुहालों की सीमाओं का आपस में सही मिलान न होने, एक मुहाल की भूमि को दूसरे मुहाल में दर्ज करना आदि अनियमितताएं पाई गई हैं। जिससे अब मौका पर निशानदेही करने, जमाबंदियों में अमल करने, मोमियों में तरमीम करने, फर्द कब्जा तैयार करने, बै-हिब्बा तबादला, तब्दीली मलकीयत केंद्र सरकार राज्य सरकार के नाम निहित करने, फॉरेस्ट डायवर्सन करने, यहां तक कि नाजायज कब्जे की मिसलें तैयार करने तक दिक्कतें पैदा हो गई हैं। जिस पर तहसीलदार सदर ने जमाबंदियों में अमल करने का प्रमाण पत्र जमा करने के आदेश एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण की इकाई को जारी किए गए थे।
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इन आदेशों पर भू अर्जन अधिकारी सिद्धार्थ आचार्य ने उपरोक्त अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए एसडीएम सदर को पत्र संख्या 672 जो कि 15 जुलाई को जारी किया गया में टिप्पणी करते हुए लिखा कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को चाहिए था कि जब आरटीआई में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी थी तो फर्द बदर लगाकर दुरुस्ती करवाते। मदन लाल शर्मा ने कहा कि इंतकालों में पाई गई गई अनियमितताओं में फर्द बदर तब लगाईं जाती हैं, जब संबंधित इंतकालों में किसी व्यक्ति विशेष का नाम आदि छूट गया हो या भूमि का क्षेत्रफल निकालते समय जमा घटाने में गलती से कोई अंक लिख दिया हो, लेकिन फोरलेन के इंतकालों में गंभीर गलतियों की पुष्टि हुई है। जिसमें फर्द बदर लगाकर छुटकारा नहीं पाया जा सकता है। समिति ने राजस्व सचिव प्रदेश सरकार से मांग की है कि उपरोक्त फोरलेन के गंभीर विषयों पर उचित कार्रवाई की जाए। ताकि राजस्व ता तारीख मुकम्मल रखा जा सके।
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